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‘वो सिर्फ कुत्ता नहीं, मेरा बच्चा है’! कानपुर की फरहा और ‘मोंटी’ की कहानी।

कानपुर शहर में इन दिनों एक ऐसी कहानी चर्चा में है, जिसने ये साबित कर दिया कि पालतू पशु सिर्फ जानवर नहीं, बल्कि परिवार होते हैं। कल्याणपुर की रहने वाली फरहा नाज ने आठ महीने पहले सड़क पर मिले एक बीमार और पैरालाइज़्ड डॉग ‘मोंटी’ को गोद लिया और उसे अपने बच्चे की तरह पाला और उसकी सेवा की।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से ‘मोंटी’ फरहा से दूर था और यही दूरी उनकी सबसे बड़ी बेचैनी बन गई थी।

क्या है पूरा मामला ?

18 दिसंबर को किसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोंटी को फरहा के घर से उठाकर एक डॉग शेल्टर में भेज दिया। तीन दिन बाद जब फरहा मोंटी को लेने पहुंचीं, तो डॉग सेंटर ने उसे लौटाने से इंकार कर दिया, और दावा किया कि मोंटी अब उनके शेल्टर में ही रहेगा।

जिसके बाद फरहा ने शेल्टर पर आरोप लगाते हुए कहा की: मोटी की हालत खराब थी और उसके शारीर से खून निकल रहा था और उनको कुत्ते से मिलने तक नहीं दिया गया और बिना अनुमति उसके इलाज का फैसला शेल्टर ने खुद ही ले लिया,जबकि मोटी का वैक्सीन, लाइसेंस और मेडिकल पेपर सभी फरहा के पास पहले से ही मौजूद थे|

DM तक पहुँची फरहा की आवाज़

6 जनवरी को फरहा नाज अपनी आस लिए डीएम जनता दर्शन पहुंचीं। आंखों में आंसू और दिल में दर्द लिए उन्होंने जिला अधिकारी से विनती की- “सर, मेरे बच्चे को दिलवा दीजिए… वो सिर्फ मेरा पालतू नहीं, मेरा परिवार है हम उसके बिना नही ज़ी सकते।”

डीएम का फैसला

डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने पूरा मामला सुना और तुरंत आदेश जारी किए। उन्होंने सीवीओ को निर्देश दिया कि कुत्ता उसी दिन फरहा नाज को लौटाया जाए और कहा की: “महिला और उसके पालतू कुत्ते के बीच बहुत गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। इसी भावना का सम्मान करते हुए ‘मोंटी’ को उसकी असली मालकिन को सौंपा गया।” आदेश के केवल एक घंटे बाद फ़रहा को उनका मोंटी वापस मिल गया। जिसके बाद मोंटी को देखते ही फरहा की आंखें नम हो गईं और मोटी भी अपनी मालकिन की गोद में सुकून से चुपचाप लिपट गया।

बता दे की ऐसा ही एक मामला कुछ दिनों पहले लखनऊ में हुआ था जिसमें दो बहनों ने अपने बीमार पालतू डॉग के लगातार खराब होते हेल्थ के चलते आत्महत्या कर ली। पुलिस के मुताबिक पालतू डॉग की हालत लगातार खराब होने से दोनों बहनें मेंटली डिस्टर्ब हो गईं थी और डिप्रेशन में फिनायल पी लिया। हॉस्पिटल पहुंचने से पहले एक की मौत हो गई और दूसरी ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था।
ये मामले साफ बताते है कि पेट्स हमारी लाइफ में सिर्फ हैप्पीनेस नहीं लाते,बल्कि वो हमार्री जिंदगी का हिस्सा बन जाते है|

news desk

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