अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ “Strait of Hormuz” में तेल टैंकरों की आवाजाही एक बार फिर सामान्य हो गई है। जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल ‘क्रूड ऑयल’ की कीमतें युद्ध से पहले के स्तर पर लौट आई हैं।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें गिरकर 73 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई हैं। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में इस रास्ते से लगभग 2 करोड़ “20 मिलियन” बैरल तेल की सुरक्षित निकासी हुई है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए एक बेहतरीन संकेत है।
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़े नियंत्रण को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी और ओमान ने मिलकर एक नया, अस्थायी समुद्री मार्ग तैयार किया है। ओमान के तट के पास बना यह नया रास्ता बिना किसी रुकावट के दुनिया भर में तेल की सप्लाई बनाए रखने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।
भले ही जहाजों का आना-जाना शुरू हो गया है, लेकिन इलाके में तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है: ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इस नए समुद्री रास्ते को ‘अस्वीकार्य और खतरनाक’ बताते हुए चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह रूट उनकी मर्जी के बिना बनाया गया है।
इस तनाव का असर हाल ही में तब देखने को मिला जब ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर हमला हुआ। इस हमले के बाद UN को कुछ समय के लिए अपनी सुरक्षा एस्कॉर्ट सर्विस को रोकना पड़ा था।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस समय बहरीन समेत अन्य खाड़ी देशों के दौरे पर हैं। उनका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती शांति समझौते को लेकर खाड़ी देशों के डर और चिंताओं को दूर करना है।
इन देशों को डर है कि प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद ईरान को जो 300 बिलियन डॉलर का फंड मिलेगा, उसका इस्तेमाल वह अपने मिसाइल प्रोग्राम और इलाके में अपना सैन्य दबदबा बढ़ाने के लिए करेगा।
रुबियो ने खाड़ी देशों को साफ तौर पर आश्वस्त किया है कि यह समझौता उनकी सुरक्षा की कीमत पर नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी तरह का टैक्स या ड्यूटी वसूलने का कोई हक नहीं है।
नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिकी चुनावों के लिहाज से यह पूरा घटनाक्रम जो बाइडन प्रशासन के लिए बेहद नाजुक और महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिर्फ 25% अमेरिकी नागरिक ही इस विवाद में अमेरिका के शामिल होने के पक्ष में हैं।
यही वजह है कि अमेरिकी सरकार अगले 60 दिनों के अंदर इस अस्थायी समझौते को एक स्थायी शांति संधि “परमानेंट पीस ट्रीटी” में बदलना चाहती है, ताकि तेल की कीमतें काबू में रहें और चुनाव से पहले घरेलू महंगाई को कंट्रोल किया जा सके।
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