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Heart Attack vs Cardiac Arrest: सही पहचान बचा सकती है जान …फर्क जानना क्यों है जरूरी?

दिल से जुड़ी बीमारियों को लेकर अक्सर लोगों में कन्फ्यूजन रहता है, खासकर हार्ट अटैक और सडन कार्डियक अरेस्ट को लेकर। दोनों ही गंभीर स्थितियां हैं, लेकिन इनका कारण, असर और इलाज अलग-अलग होता है। आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक खून के प्रवाह में रुकावट से जुड़ा होता है, जबकि कार्डियक अरेस्ट दिल की धड़कन को नियंत्रित करने वाली इलेक्ट्रिकल सिस्टम की गड़बड़ी से होता है।

हार्ट अटैक क्या होता है?

American Heart Association के मुताबिक, हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली आर्टरीज में ब्लॉकेज आ जाता है। इससे दिल के किसी हिस्से तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और उस हिस्से की मांसपेशियां धीरे-धीरे डैमेज होने लगती हैं।

इसके लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। आमतौर पर सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, पसीना आना, थकान या उलझन महसूस होना इसके संकेत हो सकते हैं। कई बार यह अचानक तेज दर्द के रूप में सामने आता है, तो कुछ मामलों में धीरे-धीरे बढ़ता है। खास बात यह है कि हार्ट अटैक के दौरान दिल धड़कना बंद नहीं करता।

सडन कार्डियक अरेस्ट क्या है?

सडन कार्डियक अरेस्ट एक अचानक होने वाली और बेहद खतरनाक स्थिति है। इसमें दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी गड़बड़ा जाती है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो जाती है या पूरी तरह रुक जाती है। इस स्थिति में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है, सांस रुक सकती है और नाड़ी महसूस नहीं होती। अगर तुरंत मदद न मिले, तो कुछ ही मिनटों में जान जाने का खतरा रहता है। इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

क्या दोनों में कोई संबंध है?

हालांकि हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट अलग स्थितियां हैं, लेकिन इनके बीच कनेक्शन हो सकता है। कई बार हार्ट अटैक के दौरान या उसके बाद कार्डियक अरेस्ट हो सकता है। हालांकि हर हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट में नहीं बदलता, लेकिन इससे खतरा जरूर बढ़ जाता है।

इमरजेंसी में क्या करें?

हार्ट अटैक के संकेत दिखें तो तुरंत इमरजेंसी सेवा को कॉल करें। मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना जरूरी है ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके। कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में तुरंत सीपीआर (CPR) शुरू करना बेहद जरूरी है। समय पर दी गई सीपीआर से मरीज की जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक जैसा समझना खतरनाक हो सकता है। सही जानकारी, लक्षणों की पहचान और समय पर उठाया गया कदम ही किसी की जिंदगी बचा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी विभिन्न रिसर्च और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है। इसे चिकित्सा सलाह का विकल्प न समझें। किसी भी नई एक्सरसाइज या गतिविधि शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

Afifa Malik

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