देशभर में बढ़ते छात्र आंदोलन और परीक्षा प्रणाली पर उठते सवालों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की घोषणा की है। इस फैसले का उद्देश्य दोषियों को जल्द सजा दिलाना और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जानकारी देते हुए कहा कि:
उन्होंने स्पष्ट किया कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक जैसी घटनाओं को लेकर छात्र लंबे समय से न्याय की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में यह निर्णय छात्रों के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने बयान में कहा:
“युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने संबंधित विभागों को तुरंत निर्देश जारी करने की बात भी कही है ताकि इस प्रक्रिया को जल्द लागू किया जा सके।
21 जुलाई को हुई एनडीए संसदीय दल की बैठक में भी पेपर लीक का मुद्दा उठाया गया था। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया था कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
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