Entertainment

फिल्म “Haal” पर मचा घमासान! — सेंसर बोर्ड ने बताये 15 से ज्यादा कट, अब हाईकोर्ट देगा फैसला

जब भी कोई फिल्म समाज के संवेदनशील हिस्सों को छूने की कोशिश करती है, तो या तो वो वाहवाही बटोरती है या फिर विवादों में घिर जाती है. इस बार के विवाद के केंद्र में है केरल से आई मलयालम फिल्म “Haal”, जो अपने कंटेंट को लेकर पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. सेंसर बोर्ड और फिल्म निर्माताओं के बीच की टकराहट अब हाईकोर्ट तक पहुंच चुकी है, जिसने खुद फिल्म देखने का फैसला लेकर नया इतिहास रच दिया है.

रोमांस के बहाने समाज को दिखाया आईना?

“Haal” सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि एक सामाजिक आईना है. कहानी एक मुस्लिम युवक और ईसाई युवती के बीच पनपते रिश्ते की है. दो अलग धर्मों से आने वाले दो दिल जब एक होते हैं, तो उनके रास्ते में सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरी सामाजिक व्यवस्था खड़ी हो जाती है.


डायरेक्टर वीरा ने इस संवेदनशील कहानी को रियलिस्टिक ट्रीटमेंट के साथ पेश किया है, जबकि शेन निगम और साक्षी वैद्य की एक्टिंग ने फिल्म को असलियत के बेहद करीब ला खड़ा किया है.

CBFC ने दिया A सर्टिफिकेट लेकिन लगाए 15 से ज्यादा कट

फिल्म जैसे ही पहुंची CBFC (Central Board of Film Certification) के पास, वहीं से शुरू हुआ असली ड्रामा. सेंसर बोर्ड ने फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट तो दिया, लेकिन साथ में 15 से ज्यादा कट लगाने को कहा.

सबसे विवादित आपत्तियां इस प्रकार रहीं:

बीफ बिरयानी खाते किरदारों का सीन, CBFC का कहना — धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं. बुर्का पहनकर कॉलेज आना, इसे संवेदनशील बताया गया. एक बिशप का इंटरफेथ लव स्टोरी को सपोर्ट करना, जिसे Catholic Congress ने ईसाई धर्म विरोधी  कहा है.

हाईकोर्ट का फैसला?

जब मामला कोर्ट पहुंचा, तो हाईकोर्ट ने CBFC से सीधे सवाल पूछे और एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया — “हम पहले फिल्म खुद देखेंगे, फिर तय करेंगे कि कट्स वाकई जरूरी हैं या नहीं.”
यह बहुत दुर्लभ है क्योंकि आमतौर पर कोर्ट कंटेंट देखे बिना सिर्फ लीगल एंगल से फैसला देता है, लेकिन इस बार जज खुद दर्शक बनेंगे.

“Haal” से उठे तीन बड़े सवाल

फिल्म “Haal” ने समाज के सामने तीन बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. पहला सवाल क्रिएटिव फ्रीडम का है — क्या फिल्ममेकर को धार्मिक और सामाजिक विषयों पर खुलकर बात करने की आज़ादी होनी चाहिए या उन्हें सीमाओं में बांध दिया जाए? दूसरा सवाल सेंसरशिप की सीमा को लेकर है — क्या CBFC अपनी शक्तियों का प्रयोग संतुलित तरीके से कर रहा है या फिर जरूरत से ज्यादा संवेदनशील होकर कला की अभिव्यक्ति को रोक रहा है? तीसरा और सबसे दिलचस्प सवाल खानपान और धार्मिक प्रतीकों का है — क्या अब फिल्मों में दिखाया गया खाना भी विवाद का कारण बन जाएगा और क्या यह भी सेंसरशिप के दायरे में आना चाहिए? ये तीनों सवाल सिर्फ “Haal” तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे भारतीय सिनेमा और समाज के विचार-विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं.

 “Haal” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज के उन कठोर सचों पर रखा गया आईना है, जिन्हें देखकर हम अक्सर आँखें फेर लेते हैं. यह हमें याद दिलाती है कि प्यार करना जितना आसान लगता है, उतना ही मुश्किल हो जाता है जब धर्म, परंपरा और समाज की दीवारें बीच में आ खड़ी होती हैं.

news desk

Recent Posts

IND vs JPN: आखिरी ओवर में वाइड पर मचा घमासान, अंपायर से भिड़े श्रेयस-अक्षर, फिर बदला फैसला

भारत और जापान के बीच मंगलवार को खेला गया ऐतिहासिक टी20 मुकाबला नतीजे से ज्यादा…

9 hours ago

जमुई कांड में एनकाउंटर के बाद सियासी घमासान, संजय राउत ने बिहार सरकार पर साधा निशाना

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस की कार्रवाई…

9 hours ago

TRAI का बड़ा फैसला: अब बिना इंटरनेट के सस्ते रिचार्ज का रास्ता साफ, सिर्फ कॉलिंग और SMS वाले प्लान लाना अनिवार्य!

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो अपने मोबाइल में इंटरनेट का इस्तेमाल…

9 hours ago

जमुई वायरल वीडियो मामले में 120 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR, नाबालिग की पहचान उजागर करने वालों पर पुलिस का शिकंजा

बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से कथित बदसलूकी के मामले में पुलिस ने अब…

10 hours ago

संजय निषाद का BJP को संदेश: ‘नाव डूबने न दें’, अमित शाह-सुनील बंसल को लेकर कही बड़ी बात

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए के भीतर सहयोगी दलों की भूमिका…

10 hours ago