नई दिल्ली: ट्रंप प्रशासन द्वारा H-1B वीज़ा फीस को $1,000 से बढ़ाकर $100,000 प्रति अप्लिकेशन करने के फैसले ने भारतीय IT सेक्टर को बड़ा झटका दिया है. इस घोषणा के बाद IT कंपनियों में तेज़ बिकवाली देखने को मिली और सिर्फ तीन दिनों में म्यूचुअल फंड्स की वैल्यूएशन ₹13,000 करोड़ घट गई.
19 सितंबर तक टॉप 10 IT कंपनियों में MFs की हिस्सेदारी की कीमत ₹3.41 लाख करोड़ थी, जो 22 सितंबर तक घटकर ₹3.28 लाख करोड़ रह गई. इसमें कुछ प्रमुख कंपनियों जैसे Infosys का वैल्यूएशन ₹4,627 करोड़, TCS का ₹2,052 करोड़ और HCL Tech का ₹1,154 करोड़ घटा. इसका असर बाजार में भी दिखा, सेंसेक्स 82,447 और निफ्टी लगभग 25,290 पर ट्रेड करता दिखा.
विश्लेषकों का मानना है कि फीस बढ़ोतरी कंपनियों के हायरिंग इकॉनॉमिक्स को प्रभावित कर सकती है. हालांकि, टॉप 10 IT कंपनियों के सिर्फ 1.2–4.1% कर्मचारी ही H-1B वीज़ा पर हैं, इसलिए असर सीमित रह सकता है. JM Financial का कहना है कि लंबी अवधि में यह कदम मामूली साबित हो सकता है.
वहीं दूसरी ओर, अडानी ग्रुप के शेयरों में मजबूती देखने को मिली. सोमवार को अडानी एंटरप्राइजेज 3.1% की बढ़त के साथ ₹2,601 पर बंद हुआ, जबकि अडानी पावर 19%, अडानी ग्रीन 6% और अडानी पोर्ट्स 1.5% चढ़े। बीते शुक्रवार से अब तक अडानी कंपनियों का मार्केट कैप ₹66,000 करोड़ बढ़ चुका है.
SEBI की जांच में अडानी ग्रुप को क्लीन चिट मिलने के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.