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मिडिल ईस्ट में महाजंग! ईरान का UAE पर भीषण मिसाइल हमला, क्या अब अमेरिका लेगा बदला?

दुबई/तेहरान। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बारूद की गंध फैल गई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए 30 दिनों के ‘सीजफायर’ (संघर्षविराम) के टूटने के साथ ही तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला करते हुए दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं।

आसमान में मिसाइलों की भिड़ंत: UAE का डिफेंस सिस्टम हाई अलर्ट पर

UAE की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NCEMA) के अनुसार, ईरान की ओर से किए गए इस मल्टी-लेयर हमले को रोकने के लिए यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम पूरी रात सक्रिय रहे। आसमान में मिसाइलों को इंटरसेप्ट किए जाने के धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। प्रशासन ने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी करते हुए उन्हें सुरक्षित बंकरों में रहने और केवल सरकारी सूचनाओं पर यकीन करने की सलाह दी है।

तबाही का हिसाब: 2000 ड्रोन और 13 मौतें

यूएई ने ईरान के इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:

  • हमलों की तीव्रता: ईरान अब तक 2000 से ज्यादा ड्रोन और सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दाग चुका है।
  • जान-माल का नुकसान: इन हमलों में अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है और 200 से अधिक घायल हैं।
  • आर्थिक चोट: हमलों का मुख्य निशाना तेल डिपो और ऊर्जा प्रतिष्ठान रहे हैं, जिससे यूएई की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

सबूतों के साथ इंसाफ की तैयारी: अटॉर्नी जनरल संभालेंगे कमान

ईरान को घेरने के लिए यूएई ने अब कानूनी रास्ता अख्तियार किया है। यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी WAM के मुताबिक, एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया गया है जिसकी अगुवाई खुद अटॉर्नी जनरल करेंगे।

कमेटी का मुख्य उद्देश्य: हमलों के तकनीकी सबूत, सैटेलाइट तस्वीरें और नुकसान का डेटा इकट्ठा करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान से मुआवजे की मांग की जा सके।

पीएम मोदी ने की निंदा, सीजफायर हुआ फेल

8 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता महज 30 दिन में ही धराशायी हो गया है। सोमवार को हुए 15 मिसाइल हमलों के बाद भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत दुनिया के कई दिग्गज नेताओं ने इस हमले की कड़ी निंदा की थी। जानकारों का मानना है कि अमेरिका के साथ यूएई के बढ़ते रक्षा संबंधों से ईरान बौखलाया हुआ है।

क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की आहट है?

यूएई ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी देश के साथ रक्षा सहयोग करने के लिए स्वतंत्र है और ईरान की धमकियों के आगे नहीं झुकेगा। जानकारों का मानना है कि अगर हमले नहीं रुके, तो अमेरिका की सीधी एंट्री इस संघर्ष को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकती है।

news desk

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