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सोने की चमक ने तोड़े सारे रिकॉर्ड!  यूएस जॉब्स डेटा के कमजोर आंकड़ों के बाद ग्लोबल मार्केट में बुलियन मार्केट में आया जबरदस्त उछाल

पिछले कुछ दिनों से ग्लोबल मार्केट में सोने ने जो रफ्तार पकड़ी है, उसने निवेशकों और मार्केट एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया है। जनवरी के बाद से यह सोने का सबसे बेहतरीन साप्ताहिक प्रदर्शन माना जा रहा है। सोने की कीमतों में यह तेजी अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे अमेरिका के हालिया आर्थिक आंकड़ों का बड़ा हाथ है।

यूएस जॉब्स डेटा ने बदला खेल

इस तेजी के पीछे का सबसे बड़ा ट्रिगर अमेरिका के कमजोर जॉब्स डेटा हैं। जैसे ही मार्केट में अमेरिकी रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कम आए, निवेश का रुख तेजी से सोने की तरफ मुड़ गया। निवेशकों के बीच यह डर कम हो गया कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से दौड़ रही है, जिसका सीधा फायदा सुरक्षित निवेश के तौर पर माने जाने वाले सोने को मिला।

फेडरल रिजर्व के रुख में नरमी की उम्मीद

कमजोर जॉब्स डेटा ने अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिजर्व “US Federal Reserve” पर टिका दी हैं। मार्केट अब मानकर चल रहा है कि फेड ब्याज दरों को लेकर अपने आक्रामक रवैये में नरमी ला सकता है। अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कटौती करता है, तो इसका मतलब है कि भविष्य में डॉलर की वैल्यू गिरेगी और गोल्ड की कीमत और भी ऊपर जाएगी।

क्यों है सोना निवेशकों की पहली पसंद?

इकोनॉमिक अनिश्चितता के इस दौर में सोना हमेशा से सेफ हेवन “Safe Haven” रहा है। जब भी शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता है या महंगाई का डर सताता है, तो निवेशक अपना पैसा सुरक्षित करने के लिए गोल्ड में शिफ्ट हो जाते हैं। मौजूदा ग्लोबल परिस्थितियों को देखते हुए सोने में यह दिलचस्पी आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

सोने की कीमतों का डॉलर के साथ हमेशा उल्टा रिश्ता रहता है। जब डॉलर कमजोर होता है, तो सोना सस्ता और सुलभ हो जाता है, जिससे ग्लोबल मार्केट में इसकी डिमांड बढ़ जाती है। इस हफ्ते डॉलर इंडेक्स में आई कमजोरी ने सोने को ऊपर उठने के लिए जो स्पेस दिया, उसने सोने की कीमतों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है।

क्या आगे भी बरकरार रहेगा ये उछाल?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की यह चाल अभी थमने वाली नहीं है। जब तक अमेरिकी इकोनॉमी के आंकड़े स्थिर नहीं हो जाते, तब तक सोने की कीमतों में वोलेटिलिटी बनी रहेगी। हालांकि, लॉन्ग टर्म में देखें तो सोना निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक मजबूत हथियार बना हुआ है। अब हर किसी की नजर फेडरल रिजर्व की अगली मीटिंग्स पर है, जो सोने की अगली दिशा तय करेंगी।

news desk

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