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‘ब्लैक फ्राइडे’ के बाद सहमा बाजार, मिडिल ईस्ट संकट ने ग्लोबल मार्केट को हिलाया,निवेशकों की बढ़ी बेचैनी आगे क्या होगा?

न्यूयॉर्क/मुंबई: वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल का दौर जारी है और इसका असर अमेरिका से लेकर भारत तक साफ नजर आ रहा है। Wall Street में गुरुवार की भारी बिकवाली के बाद शुक्रवार को भी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे Dow Jones Industrial Average अब अपने फरवरी के उच्च स्तर से 10% से ज्यादा नीचे आकर करेक्शन जोन में पहुंच गया है।

डॉव 793 अंक यानी 1.7% गिरकर 45,167 पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq Composite 2.1% टूट गया। S&P 500 लगातार पांचवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुआ, जो लगभग चार साल में इसकी सबसे लंबी गिरावट है। बाजार में यह कमजोरी ऐसे समय आई है जब Donald Trump प्रशासन मिडिल ईस्ट में लंबे टकराव के संकेत दे रहा है। ट्रंप ने Iran को 6 अप्रैल तक हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की डेडलाइन दी है, जबकि Pentagon अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है।

तेल बाजार में भी उछाल जारी है—ब्रेंट क्रूड 4% बढ़कर 112.57 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड 99.64 डॉलर तक पहुंच गया। डॉलर मजबूत हुआ, सोने में 2.7% की तेजी आई और निवेशकों का झुकाव सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ता दिखा।

भारत में ‘ब्लैक फ्राइडे’ का असर, बाजार में डर का माहौल

शनिवार (28 मार्च) को भारतीय बाजार बंद हैं, लेकिन शुक्रवार को आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों में घबराहट बनी हुई है। “ब्लैक फ्राइडे” जैसी इस गिरावट में Nifty 50 और BSE Sensex दोनों 2% से ज्यादा टूट गए।

निफ्टी 50 करीब 487 अंक गिरकर 22,819.60 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 1,690 अंक लुढ़ककर 73,583.22 पर आ गया। सिर्फ एक दिन में निवेशकों को लगभग ₹9 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।

मार्च बना सबसे खराब महीना, 2020 जैसी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार ने मार्च 2026 को अपने सबसे खराब महीनों में शामिल कर लिया है। निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही इस महीने में 10% से ज्यादा गिर चुके हैं—जो मार्च 2020 (कोविड क्रैश) के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है।

कमोडिटी, करेंसी और क्रिप्टो में भी हलचल

कमोडिटी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड 98 से 115 डॉलर के बीच बना हुआ है, जिससे ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ी है। सोने की कीमत भारत में करीब ₹14,454 प्रति ग्राम (24 कैरेट) तक पहुंच गई है।

फॉरेक्स मार्केट में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.78 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया। वहीं क्रिप्टो मार्केट भी दबाव में है, Bitcoin करीब 66,000 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है और पिछले 24 घंटों में 3% से ज्यादा गिर चुका है।

सेक्टरवार असर: बैंकिंग-ऑटो दबाव में, एनर्जी को सहारा

इस गिरावट का असर लगभग सभी सेक्टरों पर पड़ा है। बैंकिंग, फाइनेंशियल, ऑटो और रियल्टी सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में भी कमजोरी आई, जिससे पूरे बाजार पर दबाव बढ़ा।

हालांकि, एनर्जी सेक्टर को तेल की कीमतों में तेजी का फायदा मिला। ONGC जैसे शेयरों में मजबूती देखी गई। वहीं IT सेक्टर ने भी कुछ हद तक सहारा दिया और बीच-बीच में मजबूती दिखाई।

कुल मिलाकर, ग्लोबल तनाव, महंगाई की चिंता और तेल की बढ़ती कीमतों ने बाजारों को हिला कर रख दिया है। अब आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट की स्थिति और हॉर्मुज स्ट्रेट पर क्या होता है, इसी पर दुनिया भर के बाजारों की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

Gopal Singh

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