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चीन का बड़ा दावा : जीन एडिटिंग से AIDS का इलाज संभव ? चौंकाने वाले नतीजों ने बढ़ाई उम्मीदें!

HIV/AIDS के इलाज की दुनिया में एक बड़ी हलचल मची है। Wuhan University of Science and Technology (WUST) की टीम ने CRISPR-Cas12a पर आधारित एक नया सिस्टम विकसित किया है, जिसका नाम है EMT-Cas12a। आसान भाषा में समझें तो यह तकनीक वायरस के डीएनए को सिर्फ दबाती नहीं, बल्कि उसे काटकर कोशिका से निकाल फेंकने की कोशिश करती है। अगर आगे क्लिनिकल ट्रायल में भी यही नतीजे मिले, तो AIDS का “फंक्शनल इलाज” हकीकत बन सकता है।

आखिर नया क्या है?

आज HIV का स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट (cART) वायरस को कंट्रोल में रखता है, लेकिन उसे शरीर से खत्म नहीं कर पाता। दिक्कत है “लेटेंट रिजर्वायर” — यानी सोया हुआ वायरस, जो दवा बंद होते ही फिर सक्रिय हो सकता है। EMT-Cas12a का दावा है कि यह सीधे उसी छिपे हुए प्रोवायरल DNA पर हमला करता है।

इस सिस्टम में वैज्ञानिकों ने एक्सोसोम (कोशिकाओं के छोटे वेसिकल) को बायोलॉजिकल कूरियर की तरह इस्तेमाल किया। इन्हें इंजीनियर कर Cas12a mRNA और कई crRNA के साथ पैक किया गया और खास तौर पर CD4+ T कोशिकाओं तक पहुंचाने के लिए डिज़ाइन किया गया। Cas12a “जीन कैंची” की तरह काम करता है और HIV के इंटीग्रेटेड जीनोम को कई जगहों से काट देता है। नतीजा? वायरस का डीएनए टुकड़ों में बिखर जाता है।

लैब से लेकर चूहों तक—क्या दिखा?

लैब से लेकर जानवरों पर किए गए परीक्षणों तक इस तकनीक ने काफी उत्साहजनक नतीजे दिखाए। सेल लाइन पर किए गए इन विट्रो प्रयोगों में मल्टी crRNA के उपयोग के बाद HIV DNA का पता तक नहीं चला और कोई बड़ा ऑफ-टारगेट प्रभाव भी सामने नहीं आया। वहीं, एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की PBMC कोशिकाओं (एक्स विवो) पर परीक्षण में वायरस का स्तर काफी दब गया और CD4+ कोशिकाओं की संख्या बढ़ती दिखाई दी।

 इसके अलावा ह्यूमनाइज्ड चूहों (इन विवो) पर किए गए प्रयोगों में लगभग दो-तिहाई मामलों में वायरस पूरी तरह गायब पाया गया, CD4+ कोशिकाएं फिर से बहाल हुईं और सुरक्षा प्रोफाइल भी संतोषजनक रहा। कुल मिलाकर नतीजे यह संकेत देते हैं कि यह तकनीक वायरस को केवल निष्क्रिय करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे कोशिकाओं से हटाने की क्षमता भी रखती है, जो जीन-एडिटिंग की दिशा में अब तक का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

आगे की राह

रिसर्च नवंबर 2025 में ऑनलाइन प्रकाशित हुई और 2026 में जर्नल में छपी। टीम का कहना है कि टेक्नोलॉजी मेडिकल एथिक्स रिव्यू पास कर चुकी है और अब क्लिनिकल ट्रायल की तैयारी है। अगर इंसानों में भी यही रिजल्ट दोहराए गए, तो संभव है कि भविष्य में HIV मरीजों को जिंदगी भर दवाइयों पर निर्भर न रहना पड़े—एक इंजेक्शन ही काफी हो।

उम्मीद, लेकिन सावधानी भी

विज्ञान में “ब्रेकथ्रू” शब्द अक्सर जल्दी इस्तेमाल हो जाता है, लेकिन असली परीक्षा क्लिनिकल ट्रायल में होती है। सुरक्षा, दीर्घकालिक असर और लागत—तीनों अहम सवाल हैं। फिर भी, CRISPR-Cas12a और एक्सोसोम डिलीवरी का यह कॉम्बिनेशन HIV क्योर की दिशा में सबसे मजबूत दावेदारों में से एक बन चुका है।

अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो यह खोज 21वीं सदी की सबसे बड़ी बायोटेक उपलब्धियों में गिनी जा सकती है।

news desk

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