देशभर में आम जनता पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ पड़ा है। चुनाव खत्म होते ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में ताबड़तोड़ बढ़ोतरी शुरू कर दी है। पिछले महज 14 दिनों के अंदर फ्यूल की कीमतों में 7 से 8 रुपए प्रति लीटर तक का भारी उछाल आ चुका है।
इस नए हाइक के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का रेट 100 के पार निकल गया है, वहीं कई राज्यों में डीजल भी सेंचुरी लगा चुका है।
अलग-अलग राज्यों में लगने वाले वैट और लोकल ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट की वजह से कीमतें हर शहर में अलग हैं:
स्थानीय टैक्स और माल ढुलाई के खर्च में अंतर होने के कारण देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में फ्यूल की कीमतें अलग-अलग स्तर पर पहुंच गई हैं।
देश की राजधानी दिल्ली में आज सुबह हुई ताज़ा बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल की कीमत 2.61 बढ़कर 102.12 रुपए प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल 2.71 रुपए की बढ़त के साथ 95.20 रुपए प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहींमुंबई में पेट्रोल पर 2.72 रुपए का भारी उछाल देखा गया है जिससे इसका नया रेट 111.21 रुपए प्रति लीटर हो गया है, और यहाँ डीजल भी ₹2.81 की तेजी के साथ 97.83 रुपए प्रति लीटर के स्तर को छू चुका है।
महानगरों के अलावा अन्य प्रमुख शहरों और राज्यों में भी फ्यूल के दाम आसमान छू रहे हैं। हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत 115.62 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमत 103.76 रुपए प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जो कि देश के सबसे महंगे ईंधन दरों में से एक है। इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश में पेट्रोल का दाम बढ़कर 102.76 रुपए प्रति लीटर दर्ज किया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल में जनता को एक लीटर पेट्रोल के लिए 114.20 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट के इन 3 फैक्टर्स की वजह से भारत में तेल की कीमतें उबल रही हैं:
मिडिल ईस्ट क्राइसिस: पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन डिस्टर्ब हुई है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुर्ज़ के रूट पर खतरा बढ़ने से रिफाइनिंग और शिपिंग कॉस्ट काफी बढ़ गई है।
कमजोर होता रुपया: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट की वजह से भारत के लिए कच्चे तेल का इम्पोर्ट महंगा हो गया है।
पोस्ट-इलेक्शन एडजस्टमेंट: चुनाव के दौरान लंबे समय तक कीमतें थमी हुई थीं। अब तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय घाटे की भरपाई के लिए लगातार रेट रिवाइज कर रही हैं।
ग्लोबल मार्केट में क्रूड आयल की कीमतों में करीब 5% की गिरावट आई है, जो एक अच्छी खबर है। लेकिन भारतीय ग्राहकों को इसका फायदा तभी मिलेगा जब तेल कंपनियां अपना पुराना घाटा रिकवर कर लेंगी।
डीजल के दामों में 2.70 से 2.80 रुपए तक की एकमुश्त बढ़ोतरी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन पर पड़ेगा। इसके चलते फल, सब्जियां, दूध और राशन जैसी रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।FMCG प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां भी अपने दाम बढ़ा सकती हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक आने वाले दिनों में आम आदमी को न सिर्फ अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने के लिए, बल्कि घर की रसोई का बजट संभालने के लिए भी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी।
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