अगर आप भी खांसी होने पर सीधे मेडिकल स्टोर जाकर कफ सिरप (Cough Syrup) या कोई हेल्थ टॉनिक खरीद लेते थे, तो अब अपनी आदत बदल लीजिए। केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 (Drugs Rules 1945) में एक ऐतिहासिक संशोधन किया है। नए नियम के तहत, यदि किसी भी मुंह से ली जाने वाली दवा (Oral Medicine) में अल्कोहल की मात्रा 12% से ज्यादा है और उसकी पैकिंग 30 मिलीलीटर (30ml) से अधिक की है, तो वह अब शेड्यूल एच1 (Schedule H1) के दायरे में आएगी।
यानी, अब ऐसी दवाएं बेचने और खरीदने के लिए कड़े कानूनी नियमों का पालन करना होगा।
सरकार ने यह सख्त कदम दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया है। देश के कई राज्यों में कोडीन और अत्यधिक अल्कोहल युक्त कफ सिरप का इस्तेमाल धड़ल्ले से नशे के रूप में किया जा रहा था। इतना ही नहीं, पिछले साल मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप के ओवरडोज या मिलावट के कारण कई मासूम बच्चों की मौत की खबरें भी सामने आई थीं।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अक्टूबर 2025 में सरकार ने एक ड्राफ्ट तैयार कर जनता से आपत्तियां मांगी थीं। किसी भी तरह का विरोध न होने के बाद अब दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड (DTAB) की हरी झंडी से इसे पक्का कानून बना दिया गया है।
| प्रभावित पक्ष | नया नियम और असर |
| आम उपभोक्ता (मरीज) | अब सर्दी-खांसी की दवा या टॉनिक लेने के लिए डॉक्टर से पर्चा लिखवाना अनिवार्य होगा। सीधे केमिस्ट से मांगने पर दवा नहीं मिलेगी। |
| मेडिकल स्टोर (केमिस्ट) | दुकानदार को दवा खरीदने वाले मरीज का नाम, डॉक्टर का नाम और दवा की मात्रा का पूरा रिकॉर्ड एक रजिस्टर में मेंटेन करना होगा। |
| कालाबाजारी पर रोक | कफ सिरप की थोक तस्करी और अवैध बिक्री पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी। |
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