हाल ही में जुलाई 2026 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में विदेश नीति और दक्षिण एशिया से जुड़ा सार्क “SAARC” सेमिनार आयोजित किया गया था। जहां बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिद उद्दीन चौधरी अनी का एक बड़ा और तल्ख बयान सामने आया था, जिसने भारत की सामरिक और कूटनीतिक चिंताएं बढ़ा दीं।
ढाका में आयोजित SAARC सेमिनार के दौरान बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने मांग रखी कि भारत के साथ होने वाली गंगा जल संधि में सख्त ‘गारंटी क्लॉज’ जोड़ा जाए। साथ ही, लंबे समय से अटके तीस्ता जल समझौते को तुरंत पूरा किया जाए।
यह मामला सिर्फ मांग तक सीमित नहीं रहा। बांग्लादेशी मंत्री ने कड़े लहजे में चेतावनी दी कि अगर भारत ने इन मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं दिखाया, तो बांग्लादेश इस मुद्दे को यूनाइटेड नेशंस (UN) समेत तमाम अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाएगा।
भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को हुई गंगा जल बंटवारा संधि में फरक्का पर पानी बांटने का स्पष्ट फॉर्मूला तय है। यह व्यवस्था हर साल 1 जनवरी से 31 मई तक लागू होती है। संधि के मुताबिक, फरक्का पर गंगा का प्रवाह सत्तर हज़ार क्यूसेक या उससे कम होने पर दोनों देशों को 50-50 प्रतिशत पानी मिलता है।
अगर प्रवाह 70 से 75 हज़ार क्यूसेक के बीच है, तो बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक और बाकी पानी भारत को मिलता है। वहीं, प्रवाह 75 हज़ार क्यूसेक या उससे ज्यादा होने पर भारत को 40 हज़ार क्यूसेक और बचा हुआ पानी बांग्लादेश को दिया जाता है।
पानी के प्रवाह की निगरानी फरक्का और बांग्लादेश के हार्डिंग ब्रिज पर की जाती है और आंकड़ों के आधार पर 10-दिन की अवधि में बंटवारा तय होता है। यह संधि दोनों देशों के बीच गंगा के पानी के बंटवारे का प्रमुख आधार है।
1996 की यह संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है, इसलिए दोनों देशों के बीच इसके नवीनीकरण को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री ने कहा है कि उनका देश नई संधि में अपने जल अधिकारों की सुरक्षा चाहता है और जरूरत पड़ने पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी बात रखेगा।
22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से ‘abeyance’ में रखने का फैसला किया। भारत ने इसके पीछे पाकिस्तान की ओर से जारी सीमा पार आतंकवाद को कारण बताया और कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक संधि को बहाल करने का सवाल नहीं है।
तीस्ता और गंगा जल संधि को लेकर बांग्लादेश की चिंताएं और सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की आपत्तियां अलग-अलग द्विपक्षीय मुद्दे हैं। इसलिए इन्हें सीधे तौर पर भारत के खिलाफ किसी साझा रणनीति या नैरेटिव का प्रमाण कहना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, दोनों पड़ोसी देशों के साथ भारत के जल-संसाधन संबंधी विवादों ने क्षेत्रीय राजनीति में पानी को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुद्दा जरूर बना दिया है।
यूपी के कन्नौज में शुक्रवार, 21 अगस्त की देर रात डीजे को लेकर कांवड़ियों और…
बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल एक बार फिर अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं।…
गुरुग्राम: मानसून के मौसम में बुखार, सर्दी-जुकाम और संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ जाते…
मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता परीक्षित साहनी का एक ताजा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी…
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा की प्रवेश स्तरीय परीक्षा में शामिल होने के…
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में छात्र प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर छर्रे लगने के…