Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: मादुरो की गिरफ्तारी से नेहरू तक: जब भारत ने दुनिया को सिखाया ‘सीक्रेट रेस्क्यू ऑपरेशन’ का सबक
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > फीचर > मादुरो की गिरफ्तारी से नेहरू तक: जब भारत ने दुनिया को सिखाया ‘सीक्रेट रेस्क्यू ऑपरेशन’ का सबक
फीचर

मादुरो की गिरफ्तारी से नेहरू तक: जब भारत ने दुनिया को सिखाया ‘सीक्रेट रेस्क्यू ऑपरेशन’ का सबक

SYED MOHAMMAD ABBAS
Last updated: January 5, 2026 4:55 pm
SYED MOHAMMAD ABBAS
Share
SHARE

अमेरिका ने हाल ही में एक बड़े ऑपरेशन के बाद वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को अमेरिका लाया गया, जहां उनके हाथों में हथकड़ियां थीं और चारों ओर अमेरिकी सेना के अधिकारी मौजूद थे। अमेरिका पहुंचने पर मादुरो लंगड़ाते हुए नजर आए।

इस कार्रवाई को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी आलोचना हो रही है। अमेरिका ने मादुरो पर ड्रग कार्टेल चलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि ट्रंप प्रशासन अपने कदम को सही ठहरा रहा है और दावा कर रहा है कि किसी अन्य देश ने इस तरह का कोई ऑपरेशन नहीं किया है।

लेकिन यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। भारत इससे पहले दो मौकों पर ऐसे ही ऑपरेशन कर चुका है। भारत ने इंडोनेशिया और नेपाल में विशेष ऑपरेशन चलाकर वहां फंसे अपने नागरिकों या प्रमुख व्यक्तियों को उनकी सहमति से सुरक्षित रेस्क्यू कर देश वापस लाया था। यह तथ्य कई लोगों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन यह पूरी तरह सच है।

बात साल 1946 की है, जब ब्रिटिश हुकूमत ने भारत को आज़ाद करने की घोषणा की थी। उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरू अंतरिम सरकार के मुखिया थे। नेहरू उपनिवेशवाद के घोर विरोधी थे और इस मुद्दे पर लगातार लिखते-बोलते रहे। उनके निशाने पर ब्रिटेन, फ्रांस, डच और पुर्तगाल जैसे देश थे, जिन्हें वह औपनिवेशिक शासन खत्म करने की सलाह देते रहे।

इसी दौर में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापान ने इंडोनेशिया पर कब्जा कर लिया था। हालांकि, 1945 में हालात पूरी तरह बदल गए। जापान के आत्मसमर्पण के बाद सुकर्णो और मोहम्मद हत्ता ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। सुकर्णो देश के राष्ट्रपति बने, जबकि सुतान शारिर पहले प्रधानमंत्री नियुक्त हुए।

लेकिन नीदरलैंड्स (डच) अपनी पुरानी कॉलोनी इंडोनेशिया को वापस हासिल करना चाहता था। बातचीत नाकाम रहने के बाद डच औपनिवेशिक शासन ने ऑपरेशन प्रोडक्ट शुरू किया। इसके तहत डच सेना ने राजधानी जकार्ता समेत कई प्रमुख शहरों पर कब्जा कर लिया। प्रधानमंत्री सुतान शारिर को नजरबंद कर दिया गया, जबकि उपराष्ट्रपति मोहम्मद हत्ता और अन्य नेता जंगलों में छिपने को मजबूर हो गए।

इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दोनों इंडोनेशियाई नेताओं को रेस्क्यू करने का फैसला किया। इस साहसिक मिशन को सफल बनाने के लिए नेहरू ने ओडिशा के अनुभवी पायलट बीजू पटनायक को चुना। गौरतलब है कि बीजू पटनायक आगे चलकर ओडिशा के मुख्यमंत्री बने।

उस समय हालात इसलिए बेहद खतरनाक थे, क्योंकि डच प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी कर रखी थी। इसके बावजूद बीजू पटनायक ने डच निगरानी को चकमा दिया और दोनों नेताओं को सुरक्षित निकाल लिया। दोनों इंडोनेशियाई नेता 22 जुलाई को सिंगापुर और 24 जुलाई को दिल्ली पहुंचे।

इस दौरान डच फाइटर विमानों ने विमान पर हमला करने की कोशिश भी की, लेकिन बीजू पटनायक साहस और कुशलता के साथ मिशन को सफल बनाते हुए सुरक्षित बच निकले।भारत की आज़ादी के बाद नेपाल में सत्ता का संघर्ष तेज हो गया था। 1950 में नेपाल के राजा त्रिभुवन शाह नाममात्र के शासक थे, जबकि असली ताकत राणा परिवार के हाथों में थी, जिसे ब्रिटिश समर्थन भी हासिल था। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने यह चुनौती थी कि नेपाल में लोकतांत्रिक ताकतों का साथ कैसे दिया जाए।

नवंबर 1950 में राजा त्रिभुवन अपने परिवार के साथ भारतीय दूतावास में शरण लेने पहुंचे। इसके जवाब में राणा शासन ने उनके पोते ज्ञानेंद्र को राजा घोषित कर दिया। इसके बाद भारत ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राजा त्रिभुवन और उनके परिवार को एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया। नेहरू ने ज्ञानेंद्र को वैध राजा मानने से इनकार किया और राणा शासन पर कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Biju Patnaik, Donald Trump Operation, India Rescue Mission, Indonesia Rescue, Jawaharlal Nehru, Nicolas Maduro Arrest, Operation Product, Sukarno Mohammad Hatta, US Special Operation, Venezuela President Arrest
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article मंगल पांडेय पर विवादित बयान ‘मंगल पांडेय क्रिमिनल थे…फांसी जायज ’—बलिया में BJP के पूर्व विधायक के बयान से मचा सियासी बवाल
Next Article …तो क्या बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड BCCI के अहसान भूल गया?

फीचर

View More

भारत का ‘पहला गांव’ माणा जहां रौद्र रूप में दिखती है सरस्वती, 25 साल पुरानी चाय की दुकान भी बनी खास पहचान; जानें इस गांव की अनसुनी कहानी

चमोली: उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां मौजूद हर इलाके की अपनी अलग पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान है।…

By vineet verma 5 Min Read

18 साल का वो इंकलाबी, जिसकी फांसी के बाद राख चुराने की मच गई थी होड़: पढ़ें खुदीराम बोस के बलिदान की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे कई नायक हुए हैं जिन्होंने अपनी…

6 Min Read

Jharkhand Student Protest: पिता शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर बेटे हेमंत के खिलाफ क्यों उतरे छात्र? समझिए पूरा विवाद

रांची में 10 अगस्त को हुए छात्र आंदोलन ने झारखंड की राजनीति…

8 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Latest Newsफीचर

भारत का ‘पहला गांव’ माणा जहां रौद्र रूप में दिखती है सरस्वती, 25 साल पुरानी चाय की दुकान भी बनी खास पहचान; जानें इस गांव की अनसुनी कहानी

चमोली: उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां मौजूद हर इलाके की अपनी अलग पौराणिक और ऐतिहासिक पहचान है।…

5 Min Read
फीचर

18 साल का वो इंकलाबी, जिसकी फांसी के बाद राख चुराने की मच गई थी होड़: पढ़ें खुदीराम बोस के बलिदान की अमर गाथा

भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे कई नायक हुए हैं जिन्होंने अपनी जवानी देश के नाम कुर्बान कर दी, लेकिन…

6 Min Read
Trending Newsफीचर

Jharkhand Student Protest: पिता शिबू सोरेन की तस्वीर लेकर बेटे हेमंत के खिलाफ क्यों उतरे छात्र? समझिए पूरा विवाद

रांची में 10 अगस्त को हुए छात्र आंदोलन ने झारखंड की राजनीति में एक ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने सबका…

8 Min Read
Trending Newsफीचर

2026 में महाविनाश या सिर्फ अफवाह? एलियंस, वर्ल्ड वॉर 3 और पुतिन को लेकर बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों का पूरा ‘रियलिटी चेक’

नई दिल्ली। साल 2026 के बीतने में अब कुछ ही महीने बचे हैं और इसके साथ ही बुल्गारिया की अंधी…

4 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?