फिलिस्तीन को फ्रांस की मान्यता
पिछले दो सालों से चल रहे इज़राइल-गाजा युद्ध में अब इज़राइल अंतर्राष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग पड़ता दिखाई दे रहा है. ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब फ्रांस ने भी फिलीस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दे दी है.
फिलीस्तीन के मुद्दे पर अकेला पड़ा इजरायल
सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में फ्रांस ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए फिलिस्तीन को आधिकारिक रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दे दी है. इस घोषणा के साथ ही यूरोप के कई अन्य देश जैसे बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, मोनाको और एंडोरा भी इस पहल में शामिल हो गए. अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता दे दी है.
यह स्थायी शांति की दिशा में कदम है – फ्रांस
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस मौके पर कहा कि ‘यह कदम सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं बल्कि मध्यपूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक निर्णायक मोड़ है. उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘आज समय आ गया है कि हम पूरी ताकत से यह सुनिश्चित करें कि दो-राष्ट्र समाधान की संभावना जीवित रहे. इसी सोच के साथ फ्रांस फिलिस्तीन राज्य को मान्यता देता है. इस मान्यता का उद्देश्य हमास जैसे चरमपंथी गुटों को वैधता देना नहीं है, बल्कि फिलिस्तीनी जनता को एक राजनीतिक विकल्प उपलब्ध कराना है’. उन्होंने कहा कि यदि फिलिस्तीनियों को राजनीतिक विकल्प नहीं मिलेगा तो वे हिंसा और चरमपंथ की ओर धकेले जाएंगे.
इसके साथ ही फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने गाजा में चल रहे युद्ध को तुरंत रोकने, बंधकों की रिहाई और मानवीय मदद सुनिश्चित करने की अपील भी की. उनके अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह संदेश देता है कि अब समय आ गया है कि स्थायी शांति के लिए ठोस पहल की जाए.
इस तरह अब तक संयुक्त राष्ट्र के 193 देशों में 155 देश फिलीस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र की मान्यता दे चुके हैं. पर यह अभी भी प्रतीकात्मक ही है , क्योंकि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य होते हुए अभी भी वीटो कर सकता है.
इजरायल को है अमेरिका का भरोसा
फिलहाल विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रांस सहित प्रमुख पश्चिमी देशों के इस फैसले से पश्चिमी एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है. अब अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ेगा कि इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों एक साझा समाधान की दिशा में आगे बढ़ें. हालांकि अमेरिका अभी भी इस कदम से सहमत नहीं है, क्योंकि उसका कहना है कि फिलिस्तीन की राष्ट्र की मान्यता सीधे वार्ता से ही संभव होनी चाहिए.
फ्रांस और तमाम यूरोपीय देशों का ये कदम इजरायल के लिए झटके जैसा है. क्योंकि इस समय इजरायल गाजा सिटी पर कब्जा कर रहा है.
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