नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर फर्स्ट एसी कोच के एक केबिन का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उसे फूलों, फेयरी लाइट्स और सजावटी सामान से बिल्कुल हनीमून सुइट की तरह तैयार किया गया दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि क्या भारतीय रेलवे अपने कोच या केबिन को इस तरह सजाने की अनुमति देता है। मामले ने तूल पकड़ा तो रेलवे ने जांच के बाद कार्रवाई भी कर दी।
वीडियो में देखा जा सकता है कि फर्स्ट एसी के एक निजी केबिन की बर्थ पर गुलाब की पंखुड़ियों से दिल का आकार बनाया गया था। इसके अलावा केबिन में ताजे फूल, सजावटी लाइटें, मोमबत्तियां और ‘आई लव यू’ लिखा हुआ बोर्ड भी लगाया गया था। पूरी सजावट किसी होटल के विशेष कमरे जैसी दिखाई दे रही थी।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने पूछा कि क्या रेलवे के नियम ऐसे निजी सजावट की इजाजत देते हैं। वहीं कुछ लोगों ने इसे सार्वजनिक संपत्ति का गलत इस्तेमाल बताते हुए सवाल किया कि आखिर ट्रेन के कोच में इस तरह की सजावट की अनुमति किसने दी।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, 6 जुलाई को ट्रेन संख्या 11002 बल्हारशाह–मुंबई नांदेड़ग्राम एक्सप्रेस में एक दंपति ने जालना से मुंबई की यात्रा के लिए फर्स्ट एसी के जी कूप की बर्थ संख्या 19 और 20 आरक्षित कराई थी। दोनों यात्रियों को छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन से ट्रेन में सवार होना था।
बताया गया कि यात्रियों ने जालना के एक डेकोरेटर से ऑनलाइन संपर्क कर केबिन सजाने की व्यवस्था खुद कराई थी। इसके बाद डेकोरेटर का प्रतिनिधि जालना स्टेशन से ट्रेन में चढ़ा और यात्रा शुरू होने से पहले पूरे केबिन को सजाया।
रेलवे की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डेकोरेटर बिना किसी अधिकृत अनुमति के ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच में प्रवेश कर गया था। रेलवे ने इसे सुरक्षा और नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
मामले की जिम्मेदारी तय करते हुए ड्यूटी पर मौजूद नांदेड़ रेलवे के चीफ टिकट इंस्पेक्टर (टीटीई) गिरीश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
रेलवे ने डेकोरेटर के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। उस पर बिना अनुमति ट्रेन में प्रवेश करने, बिना टिकट यात्रा करने और अनधिकृत रूप से रेलवे परिसर व कोच में आने के आरोप में रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
रेलवे ने इस पूरे घटनाक्रम की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि बिना अनुमति बाहरी व्यक्ति ट्रेन के फर्स्ट एसी कोच तक कैसे पहुंचा और इस लापरवाही के लिए किन अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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