मृतक परिवार
बैंक के कर्ज से परेशान होकर शख्स ने उठाया खौफनाक कदम. अंजाम देख सिहर उठे लोग, 36 पन्नों के सुसाइड नोट में बताई ये वजह.
शाहजहांपुर- शाहजहांपुर से बुधवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई. जिसने भी वो मंजर देखा उसकी आंखें नम थी. एक खौफनाक फैसले ने हंसते खेलते घर को उजाड़ दिया. इसके पीछे की कहानी आपके होश उड़ा देगी.
शाहजहांपुर के पॉश इलाके में स्थित दुर्गा इंक्लेव में एक भयावह घटना में एक परिवार तबाह हो गया. कर्ज से घिरे एक पिता सचिन ग्रोवर ने अपने ही हाथों अपनी जिंदगी तबाह कर दी. सचिन ने पहले अपने चार साल के मासूम बेटे को जहर देकर मार डाला, उसके बाद अपनी पत्नी की भी जान ले ली और अंत में खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. इस तरह एक पूरा परिवार खत्म हो गया.
मौके पर पहुंची पुलिस
रोज़ की तरह जब सुबह मृतक सचिन ग्रोवर और उसका परिवार के साथ नाश्ते के लिए नीचे नहीं उतरा, तो चिंतित होकर सचिन की सास संध्या मिश्रा ने ऊपर जाकर कमरा खोला. अंदर का मंज़र देखते ही वह जोर से चीख पड़ीं. उनकी चीख सुनकर पड़ोसी और घर वाले इकट्ठा हो गए और मौके पर पुलिस को बुलाया गया. थाना रौज़ा प्रभारी राजीव कुमार अपनी टीम के साथ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे. घटना की जांच के लिए FSSL की फोरेंसिक टीम को बुलाया गया. जांच में पता चला कि मृतक सचिन अपने बड़े भाई गौरव ग्रोवर के परिवार के साथ रहता था और हैंडलूम का बिजनेस करता था.
सुसाइड नोट में बतायी ये वजह
सचिन ग्रोवर ने आत्महत्या से पहले एक 36 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था, जिसे उसने अपने एक रिश्तेदार के मोबाइल पर भेजा था. इस नोट में उसने अपने इस भयावह कदम की वजह बताई है. माना जा रहा है कि अपने हैंडलूम के व्यवसाय के लिए लिया गया बैंक का कर्ज़ उसे चुका पाना मुश्किल हो रहा था, जिसके चलते वह गहरे तनाव और आर्थिक परेशानियों में था. इसी तनाव ने उसे पूरे परिवार की जीवन लीला समाप्त करने के लिए विवश किया. हालांकि, परिजनों ने अभी तक यह सुसाइड नोट पुलिस को सौंपने से इनकार कर दिया है.
जब चार वर्षीय फत्ते ग्रोवर के शव को पोस्टमार्टम के लिए उठाया जा रहा था, तो मौके पर मौजूद आम लोगों से लेकर पुलिसकर्मियों की आंखें भी नम हो गईं. तीनों शवों को एक साथ उठते देख पूरी कॉलोनी में सन्नाटा और शोक छा गया. पुलिस मामले की हर तरह से छानबीन में लगी है.
क्यों बढ़ रहे हैं सुसाइड के केस?
NCRB के आंकड़ों के अनुसार साल 2022 में देशभर में कुल 170924 सिसाइड के मामले दर्ज हुए थे जो कि 2018 की तुलना में 27 प्रतिशत ज्यादा थे. यानी सुसाइड के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इनमें आर्थिक तंगी या फिर कर्ज के चलते 7034 सुसाइड के मामले थे. बहुत से मामले मानसिक दबाव के भी होते हैं जिनके पीछे कर्ज एक प्रमुख कारण होता है.
अक्सर इस तरह की खबरें पढ़ने और सुनने को मिलती है फला उद्योगपति बैंक के साथ फ्रॉड करके देश छोड़ कर भाग गया. या फिर बैंक ने किसी बड़े उद्योगपति के करोड़ों के कर्जे को माफ कर दिया. लेकिन जब बात एक आम आदमी की हो तो बैंक का दबाव इतना बढ़ जाता है कि लोग सुसाइड करने पर मजबूर हो जाते हैं.
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