पुणे: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन से फिल्म जगत और उनके चाहने वालों में शोक की लहर है। 75 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले नाना पाटेकर ने अपने पीछे अभिनय की बेमिसाल विरासत के साथ कई भावुक यादें भी छोड़ी हैं। उनके बेटे मल्हार पाटेकर ने पिता के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद किया, तो उनकी आंखें नम हो गईं। मल्हार के मुताबिक, जिंदगी के आखिरी वक्त में भी नाना पाटेकर को अपनी नहीं, बल्कि बेटे की सेहत की चिंता सता रही थी।
मल्हार ने बताया कि उनकी तबीयत पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं थी। इसी वजह से नाना पाटेकर उनसे लगातार परेशान रहते थे। आखिरी बातचीत में भी उन्होंने बेटे को अपनी सेहत का ध्यान रखने की सलाह दी थी। पिता के वे शब्द आज मल्हार के लिए बेहद भावुक कर देने वाली याद बन गए हैं।
मल्हार पाटेकर ने पिता को याद करते हुए बताया कि नाना साहेब उनसे बात करते समय खुद से ज्यादा उनकी सेहत को लेकर चिंतित थे। मल्हार के अनुसार, उनकी तबीयत कुछ दिनों से खराब चल रही थी, जिसे लेकर नाना पाटेकर काफी फिक्रमंद थे।
आखिरी बातचीत में उन्होंने बेटे से कहा था, “मेरे लिए बस इतना ही काफी है कि तू बस अपनी तबीयत का ध्यान रख।” पिता के ये शब्द बताते हैं कि आखिरी समय तक उनकी प्राथमिकता बेटे की सलामती थी। मल्हार ने भावुक होते हुए यह भी कहा कि नाना साहेब जैसे लोग कभी सच में दुनिया से नहीं जाते, वे अपने काम और यादों के जरिए हमेशा लोगों के बीच जिंदा रहते हैं।
नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर निधन हो गया था। उन्हें कार्डियक अरेस्ट आने के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और सुबह करीब 5:20 बजे मृत घोषित कर दिया गया।
पोस्टमार्टम के बाद उनका पार्थिव शरीर पुणे लाया गया। इसके बाद डोंजे गांव स्थित उनके फार्महाउस के पास देर रात अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार ने ही उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान उनकी पत्नी नीलकांति भी मौजूद रहीं।
अंतिम संस्कार देर रात किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर मल्हार ने बताया कि इसके पीछे कोई खास वजह नहीं थी। सुबह निधन होने और काफी समय बीत जाने के कारण परिवार ने देर रात ही अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी गई।
नाना पाटेकर सिर्फ अपनी अदाकारी ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने ‘नाम’ फाउंडेशन के जरिए जल संरक्षण, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में काम किया। इस पहल के तहत उन्होंने कई लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां भी सौंपी थीं।
मल्हार ने साफ किया कि वह अपने पिता के सामाजिक कार्यों को रुकने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि नाना साहेब का काम आगे बढ़ाया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा में प्रस्तावित कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री से भी बातचीत हुई है।
नाना पाटेकर की विरासत अब उनके अभिनय, उनके सामाजिक योगदान और परिवार के साथ जुड़ी उन यादों में आगे बढ़ेगी, जिन्हें उनके चाहने वाले लंबे समय तक संजोकर रखेंगे।
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