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जौहर यूनिवर्सिटी के 494 करोड़ के निर्माण खर्च पर ED की नजर, सरकारी सामग्री और चंदे की भी जांच

  • रामपुर में सपा नेता आजम खान से जुड़े मामले में वित्तीय लेनदेन की पड़ताल तेज
  • सरकारी निर्माण सामग्री के कथित इस्तेमाल और ट्रस्ट को मिले 6 करोड़ रुपये के चंदे पर उठे सवाल

रामपुर/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान से जुड़े मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण खर्च और फंडिंग को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का दायरा बढ़ रहा है। जांच एजेंसी विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च, सरकारी धन और सामग्री के कथित इस्तेमाल तथा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे के स्रोत की पड़ताल कर रही है। इसी सिलसिले में आजम खान से रामपुर जेल में पूछताछ भी की गई है।

मामले में सामने आए आरोपों के मुताबिक, विश्वविद्यालय की इमारतों के निर्माण पर करीब 494 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन किया गया, लेकिन इस खर्च का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं होने का दावा किया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़ी सामग्री का इस्तेमाल निजी विश्वविद्यालय परिसर में तो नहीं किया गया। हालांकि, ये आरोप जांच का हिस्सा हैं और इनसे अपने आप किसी की आपराधिक जिम्मेदारी साबित नहीं होती।

494 करोड़ रुपये के निर्माण खर्च का हिसाब जांच के केंद्र में

रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण खर्च को लेकर जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड खंगाल रही हैं। ED यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विश्वविद्यालय की इमारतों के निर्माण में कितना पैसा खर्च हुआ, रकम कहां से आई और उसका इस्तेमाल किन कार्यों में किया गया।

जांच से जुड़े दावों के अनुसार, निर्माण पर करीब 494 करोड़ रुपये खर्च होने का आकलन सामने आया है। एजेंसी यह भी देख रही है कि निर्माण से संबंधित दस्तावेज, भुगतान और वित्तीय लेनदेन उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल खाते हैं या नहीं।

सरकारी निर्माण सामग्री के निजी परिसर में इस्तेमाल का आरोप

इस मामले का एक अहम पहलू सरकारी निर्माण कार्यों से जुड़ी सामग्री के कथित इस्तेमाल का है। आरोप है कि उत्तर प्रदेश में आजम खान के मंत्री रहने के दौरान करीब 85 करोड़ रुपये की सरकारी निर्माण सामग्री निजी विश्वविद्यालय परिसर में इस्तेमाल की गई।

बताया जा रहा है कि इस सामग्री से हॉस्टल, अस्पताल, पंडाल और अन्य इमारतों का निर्माण कराया गया। ED की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सामग्री किस परियोजना के लिए खरीदी गई थी, उसका आवंटन कहां हुआ और उसका वास्तविक इस्तेमाल किस निर्माण कार्य में किया गया।

इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।

ट्रस्ट को मिले 6 करोड़ रुपये के चंदे की भी पड़ताल

जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे का स्रोत भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मेरठ की दो संस्थाओं ने ट्रस्ट को कुल करीब 6 करोड़ रुपये का चंदा दिया था। इन संस्थाओं का संबंध डॉ. सरोजनी अग्रवाल से बताया गया है, जो पहले समाजवादी पार्टी की विधान परिषद सदस्य (MLC) रह चुकी हैं और बाद में भाजपा में शामिल हुई थीं।

ED यह पता लगाने में जुटी है कि ट्रस्ट को मिली रकम का स्रोत क्या था, दान देने वाली संस्थाओं की वित्तीय स्थिति क्या थी और धनराशि का इस्तेमाल किन कार्यों में किया गया। केवल किसी संस्था द्वारा चंदा दिए जाने या किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने के आधार पर किसी तरह की अनियमितता साबित नहीं होती। इस मामले में संबंधित लेनदेन और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

आजम खान से जेल में पूछताछ, फंडिंग और लेनदेन पर फोकस

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ED की टीम ने 13 अक्टूबर को रामपुर जेल में आजम खान से पूछताछ की। यह कार्रवाई जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले की जांच का हिस्सा थी। एजेंसी चंदे के स्रोत, संस्थाओं के बीच धन के लेनदेन और निर्माण कार्यों में रकम के इस्तेमाल का पता लगा रही है।

जांच का उद्देश्य यह स्थापित करना है कि विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन में कोई गैरकानूनी गतिविधि हुई या नहीं। फिलहाल जांच एजेंसी के आरोपों और दावों को अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।

जांच के निष्कर्षों पर टिकी आगे की कार्रवाई

जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण खर्च, कथित सरकारी सामग्री के इस्तेमाल और ट्रस्ट को मिले चंदे से जुड़े सवाल इस मामले के प्रमुख पहलू हैं। अब जांच एजेंसी के सामने वित्तीय दस्तावेजों का मिलान करने, रकम के स्रोत का पता लगाने और निर्माण कार्यों से जुड़े लेनदेन की कड़ियां जोड़ने की चुनौती है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में उपलब्ध रिकॉर्ड और साक्ष्य आरोपों की पुष्टि करते हैं या नहीं।

news desk

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