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“भारत को लेकर क्या है ट्रंप की सोच? राष्ट्रपति द्वारा साझा किए गए माइकल सैवेज के ‘विवादित पत्र’ से हुआ खुलासा”

वॉशिंगटन। अमेरिका में जन्मसिद्ध नागरिकता (Birthright Citizenship) को लेकर चल रही बहस ने एक नया और विवादास्पद मोड़ ले लिया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक पत्र ने न केवल अमेरिकी राजनीति, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल पैदा कर दी है।

रेडियो होस्ट माइकल सैवेज द्वारा लिखे गए इस पत्र में भारत और चीन जैसे देशों के प्रवासियों के खिलाफ बेहद तीखी और विवादित टिप्पणियां की गई हैं।

नागरिकता के प्रावधानों पर सवाल

माइकल सैवेज ने अपने नोट में अमेरिका के वर्तमान नागरिकता कानूनों को ‘पुराना’ बताते हुए उनमें आमूल-चूल बदलाव की वकालत की है। उनका तर्क है कि गैर-नागरिकों के बच्चों को केवल अमेरिका में जन्म लेने के आधार पर नागरिकता देना गलत है। सैवेज का मानना है कि इस संवेदनशील मुद्दे का फैसला अदालतों के बजाय ‘राष्ट्रीय जनमत संग्रह’ (National Referendum) के जरिए होना चाहिए।

‘बर्थ टूरिज्म’ और प्रवासियों पर सीधा निशाना

पत्र में प्रवासियों पर सिस्टम के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए बेहद आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया है।सैवेज ने अन्य देशों के लिए ‘हेलहोल’ (Hellhole) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और प्रवासियों को ‘लैपटॉप वाले गैंगस्टर’ तक कह डाला। पत्र में दावा किया गया कि लोग केवल नागरिकता और सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने के लिए ‘बर्थ टूरिज्म’ का सहारा लेते हैं और बाद में अपने पूरे परिवार को अमेरिका बुला लेते हैं।

ट्रंप का दावा बनाम वैश्विक वास्तविकता

ट्रंप ने इस पत्र को ऐसे समय में साझा किया जब वे खुद जन्मसिद्ध नागरिकता को खत्म करने के पक्ष में बयान दे रहे हैं। हालांकि, ट्रंप के उस दावे पर भी सवाल उठ रहे हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका के अलावा कोई भी देश ऐसी नागरिकता नहीं देता। वास्तविकता यह है कि कनाडा और मेक्सिको सहित दुनिया के लगभग 36 देश आज भी जन्म के आधार पर नागरिकता प्रदान करते हैं।

बढ़ता राजनीतिक तनाव

इस पोस्ट के बाद मानवाधिकार संगठनों और एशियाई-अमेरिकी समुदायों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की नस्लवादी भाषा न केवल प्रवासियों के योगदान का अपमान करती है, बल्कि समाज में विभाजन को भी बढ़ावा देती है। अब देखना यह है कि आगामी चुनावों में यह मुद्दा अमेरिकी मतदाताओं के बीच क्या रुख अख्तियार करता है।

news desk

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