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दोहा में इस्लामिक देशों की हुई आपातकालीन बैठक, कतर पर इज़राइली हमले के बाद अरब देशों की  बढ़ी बेचैनी

हाल ही में इजरायल द्वारा कतर पर किए गए हमले के बाद अब यह मुद्दा इस्लामिक देशों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन चुका है. इसी के मद्देनजर सोमवार को कतर की राजधानी दोहा में अरब और इस्लामी देशों का आपातकालीन शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया.

इस शिखर सम्मेलन में सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान समेत 50 से अधिक मुस्लिम देश भाग ले रहे हैं. बीते दो वर्षों में इज़रायल यमन, लेबनान, ईरान, सीरिया, फिलिस्तीन और कतर—कुल छह देशों पर हमले कर चुका है. ऐसे में दोहा में हो रही यह बैठक केवल कतर की संप्रभुता का मुद्दा नहीं, बल्कि मुस्लिम दुनिया की सामूहिक सुरक्षा के रूप में देखा जा रहा है.

कतर का कड़ा रुख

रविवार को हुई तैयारियों की बैठक में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी ने इजरायल के हमले को “बर्बर” करार देते हुए मुस्लिम देशों से एकजुट होकर कड़ी प्रतिक्रिया देने का आह्वान किया था. उन्होंने यह भी कहा कि ‘अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दोहरे मापदंड छोड़कर इज़रायल को उसके अपराधों के लिए जिम्मेदार ठहराना चाहिए.’

क्यों है तुर्की को इज़राइल से डर ?

विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला सिर्फ कतर तक सीमित नहीं है.इज़रायल लंबे समय से तुर्की पर हमास को आर्थिक और वैचारिक समर्थन देने का आरोप लगाता रहा है. साथ ही इजरायल ने कुछ समय पहले यह भी कहा था कि वह गाजा के बाहर अन्य देशों में मौजूद हमास नेतृत्व को भी निशाना बनाएगा. यही कारण है कि अब तुर्की को भी खतरे की आशंका है, क्योंकि वहां भी हमास नेताओं को पनाह मिलती रही है. तुर्की नाटो का सदस्य और अमेरिका का सहयोगी है, लेकिन कतर पर हमले ने उसकी सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है, क्योंकि कतर नाटो घनिष्ठ सहयोगी है, इसके बाद भी इज़राइल ने उसपर हमला किया.

ड्राफ्ट प्रस्ताव में क्या है ?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार के शिखर सम्मेलन में ड्राफ्ट प्रस्तुत होना है , जिसमें स्पष्ट चेतावनी है कि “इज़रायल की आक्रामक कार्रवाइयां—कतर पर हमला, नरसंहार, घेराबंदी और जातीय सफाया—क्षेत्रीय शांति और सह-अस्तित्व के प्रयासों के लिए गंभीर खतरा हैं.”  अरब और इस्लामिक देशों का मानना है कि इजरायल के इस हमले से कतर की संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है.

रणनीतिक मायने

इज़रायल का कतर पर हमला इसलिए भी अहम है क्योंकि कतर में अमेरिकी सैन्य ठिकाना मौजूद है और वह वाशिंगटन का करीबी सहयोगी है. इसके बावजूद इजरायल ने हमला किया, जो उसके दुस्साहस को दर्शाता है. यही वजह है कि अब मुस्लिम देशों को डर है कि भविष्य में तुर्की या किसी और पर भी इसी तरह का हमला हो सकता है. यही कारण है कि इस्लामिक दुनिया कतर पर हुए इस हमले को अपने लिए गंभीर खतरे के रूप में देख रही है.

news desk

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