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लखनऊ में दिव्यांग महागठबंधन का जोरदार प्रदर्शन, 27 सूत्री मांगों पर सरकार की अनदेखी का आरोप

लखनऊ.राजधानी लखनऊ में दिव्यांग महागठबंधन के नेतृत्व में प्रदेशभर से आए दिव्यांगजन सरकार के खिलाफ सड़क पर उतर आए। दिव्यांगजनों का आरोप है कि सरकार द्वारा तय की गई सुविधाएँ और योजनाएँ जमीनी स्तर पर उन तक नहीं पहुँच पा रही हैं, जिसके कारण उन्हें लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

प्रदर्शनकारियों ने अपनी 27 सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया और सरकार पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया. दिव्यांग महागठबंधन के महासचिव वीरेंद्र कुमार ने मीडिया से बातचीत में सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना है कि “सरकार दिव्यांगजनों की समस्याओं को नजरअंदाज़ कर रही है। हमारी 27 सूत्री मांगें वर्षों से लंबित हैं, इसलिए मजबूरन हमें सड़क पर उतरना पड़ा है. ”

दिव्यांग महागठबंधन के नेताओं का आरोप है कि UPSSSC की लापरवाही के कारण कई चयनित अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिल पाए हैं। उनका कहना है कि लगभग 188 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया अटकी हुई है, लेकिन आयोग केवल आश्वासन देकर अभ्यर्थियों को गुमराह कर रहा है.

महासचिव वीरेंद्र कुमार ने सरकार से मांग की कि दिव्यांगजनों के लिए एक ऐसा सामाजिक समानता कानून बनाया जाए, जिसमें नौकरी, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, सुरक्षा, आवास और जीवनयापन जैसी मूल जरूरतों की पूरी गारंटी सुनिश्चित की जाए.

उन्होंने यह भी कहा कि 21 प्रकार की दिव्यांगता को देखते हुए आरक्षण को 4% से बढ़ाकर 10% किया जाए। इसके साथ ही दिव्यांग पेंशन को वर्तमान ₹1000 की जगह ₹5000 प्रतिमाह करने, और सरकारी विभागों में कार्यरत दिव्यांग कर्मचारियों को गृह जनपद में तैनाती देने की मांग उठाई.

इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने घरों में मुफ़्त बिजली मीटर, और बिजली बिल में पूरी तरह छूट देने की भी मांग की. दिव्यांगजनों का कहना है कि कम पेंशन, रोजगार न मिलना, आयुष्मान कार्ड न बनना और मूल सुविधाओं से वंचित रहना उनके जीवन को बेहद कठिन बना रहा है. कई परिवार तो राशन जैसी बुनियादी सुविधाएँ तक नहीं पा रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी चुनाव में प्रदेश के 54 लाख दिव्यांग मतदाता अपनी वोट शक्ति से सरकार को जवाब देंगे।

news desk

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