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इस्तीफे के बाद भी नहीं घटेगा धर्मेंद्र प्रधान का सियासी कद? ओडिशा BJP में असर बरकरार रहने के पीछे ये हैं बड़ी वजहें

नई दिल्ली: नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, ओडिशा भाजपा के भीतर जिस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, उनसे संकेत मिल रहे हैं कि इस्तीफे के बावजूद राज्य की राजनीति में धर्मेंद्र प्रधान का प्रभाव कम होने वाला नहीं है। पार्टी के भीतर उन्हें अब भी सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जा रहा है।

ओडिशा BJP में लंबे समय से मजबूत पकड़

राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले 57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान को ओडिशा भाजपा का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनका इस्तीफा संगठन में उनकी कमजोर होती स्थिति का संकेत नहीं, बल्कि राजनीतिक जवाबदेही का उदाहरण है। नेता ने यह भी कहा कि इस्तीफे के बाद भी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व पूरी तरह उनके साथ खड़ा है।

शीर्ष नेतृत्व का समर्थन क्यों माना जा रहा अहम?

धर्मेंद्र प्रधान को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का समर्थन ऐसे समय मिला है, जब विपक्ष उनके इस्तीफे को उनके कार्यकाल की विफलता से जोड़कर लगातार हमला बोल रहा है। दूसरी ओर, भाजपा इसे राजनीतिक जिम्मेदारी निभाने और संगठन को प्राथमिकता देने के फैसले के रूप में पेश कर रही है। वहीं विपक्ष इस घटनाक्रम को युवाओं की जीत और सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है।

क्या ओडिशा में बदलेगा पावर बैलेंस?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इससे ओडिशा भाजपा के भीतर शक्ति संतुलन बदलेगा। हालांकि, राज्य भाजपा के सूत्रों ने उन्हें किनारे किए जाने की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि 2014 के बाद से ओडिशा में भाजपा के विस्तार और 2024 विधानसभा चुनाव में सत्ता तक पहुंचने में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका बेहद अहम रही है।

सूत्रों के अनुसार, उन्होंने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ अन्य दलों के प्रभावशाली नेताओं को भाजपा से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे कई विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई।

147 विधानसभा सीटों पर प्रभाव का दावा

पार्टी नेताओं का मानना है कि ओडिशा भाजपा के 78 विधायकों में बड़ी संख्या ऐसे नेताओं की है, जिन्हें धर्मेंद्र प्रधान का समर्थन प्राप्त रहा है। वहीं राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्यों को भी उनका करीबी माना जाता है।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता के अनुसार, ओडिशा की 147 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक पकड़ रखने वाले नेताओं में धर्मेंद्र प्रधान सबसे आगे हैं। वर्षों की मेहनत से उन्होंने राज्यभर में मजबूत राजनीतिक नेटवर्क तैयार किया है, जिसकी झलक हालिया घटनाक्रम के दौरान उनके समर्थन में सामने आई प्रतिक्रियाओं से भी देखने को मिली।

सांसदों और मंत्रियों का भी मिला समर्थन

धर्मेंद्र प्रधान को संसद में उनके सहयोगियों, ओडिशा सरकार के कई मंत्रियों और पार्टी की जिला इकाइयों का भी समर्थन मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के अधिकांश भाजपा सांसद भी उनके पक्ष में दिखाई दिए। कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनके योगदान की सराहना करते हुए उनके समर्थन में बयान दिए।

मोदी कैबिनेट में नए चेहरे की संभावना

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार में ओडिशा के प्रतिनिधित्व को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि उनके स्थान खाली होने से राज्य के अन्य नेताओं के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह बनाने का अवसर बन सकता है। इससे ओडिशा भाजपा के भीतर नए शक्ति केंद्र उभरने और संगठनात्मक समीकरणों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

vineet verma

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