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आप भी ले जाते हैं फ्लाइट में पावरबैंक ? जान लीजिए DGCA का नया रूल, वरना हो सकती है परेशानी

नई दिल्ली – अगर आप फ्लाइट में सफर करते वक्त पावर बैंक साथ रखते हैं, तो सावधान हो जाइये! नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने लिथियम बैटरी से चलने वाले उपकरणों, खासकर पावर बैंक से आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए उड़ानों के लिए नए और सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब फ्लाइट के दौरान न तो पावर बैंक से मोबाइल या किसी अन्य डिवाइस को चार्ज किया जा सकेगा और न ही पावर बैंक को खुद चार्ज करने की अनुमति होगी। DGCA का कहना है कि यह फैसला यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।

क्यों सख्त हुए पावर बैंक नियम

DGCA का यह कदम नवंबर 2025 में जारी डेंजरस गुड्स एडवाइजरी सर्कुलर पर आधारित है। पिछले कुछ समय में भारत और विदेशों में पावर बैंक से जुड़ी कई घटनाएं सामने आई हैं, जिन्होंने विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। अक्टूबर 2025 में दिल्ली से दिमापुर जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट में टैक्सिंग (जब विमान रनवे पर उड़ान भरने से पहले या लैंडिंग के बाद ज़मीन पर धीरे-धीरे चलता है।) के दौरान एक यात्री के पावर बैंक में आग लग गई थी। केबिन क्रू ने तुरंत आग बुझा दी और सभी यात्री सुरक्षित रहे, लेकिन यह घटना एक बड़ी चेतावनी बनकर सामने आई। इसी तरह चीन से सियोल जा रही उड़ान में हवा में ही पावर बैंक से धुआं भर गया था। जनवरी 2025 में दक्षिण कोरिया में एयर बसान के विमान में ओवरहेड बिन में रखे पावर बैंक से आग लगने से पूरा विमान जल गया था। इन घटनाओं के बाद नियमों को सख्त करना जरूरी हो गया था।

नए नियम क्या कहते हैं

DGCA के नए दिशानिर्देशों के मुताबिक पावर बैंक और स्पेयर लिथियम बैटरी केवल हैंड बैगेज में ही ले जाई जा सकती है। इन्हें चेक-इन बैग या ओवरहेड बिन में रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। यात्रियों को इन्हें सीट के नीचे या सीट-बैक पॉकेट में रखना होगा, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति में तुरंत ध्यान दिया जा सके। उड़ान के दौरान पावर बैंक से किसी भी डिवाइस को चार्ज करना या पावर बैंक को सीट पावर आउटलेट से चार्ज करना सख्त मना है। क्षमता को लेकर भी सीमा तय की गई है—100 वॉट-घंटा तक के पावर बैंक बिना अनुमति ले जाए जा सकते हैं, 100 से 160 वॉट-घंटा के लिए एयरलाइन की मंजूरी जरूरी होगी और 160 वॉट-घंटा से ज्यादा क्षमता वाले पावर बैंक पूरी तरह बैन रहेंगे।

आग का खतरा और यात्रियों की जिम्मेदारी

विशेषज्ञों के मुताबिक लिथियम बैटरियों में ‘थर्मल रनअवे’ की समस्या होती है, जिसमें बैटरी ओवरहीट होकर खुद ही जलती रहती है और उसे बुझाना बेहद मुश्किल हो जाता है। सस्ते या खराब क्वालिटी वाले पावर बैंक इस खतरे को और बढ़ा देते हैं। DGCA ने यात्रियों से अपील की है कि अगर किसी डिवाइस से गर्मी, धुआं या अजीब गंध महसूस हो, तो तुरंत केबिन क्रू को सूचना दें। एयरलाइंस को भी ऐसी घटनाओं की रिपोर्ट DGCA को करना अनिवार्य होगा।

DGCA का मानना है कि ये नियम भले ही सफर को थोड़ा असुविधाजनक बनाएं, लेकिन यात्रियों की जान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पहले ही ऐसे नियम लागू कर चुकी हैं और अब भारत में भी यात्रियों को जागरूक और सतर्क रहना होगा, ताकि एक छोटी सी लापरवाही उड़ान के लिए बड़ा खतरा न बन जाए।

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