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Delimitation Bill: महिला आरक्षण-परिसीमन बिल पर शरद पवार की NCP का बड़ा दांव! सुप्रिया सुले ने मोदी सरकार के सामने रख दी ये ‘कड़ी शर्त’

आधी रात की सीक्रेट मीटिंग के बाद सुप्रिया सुले का बड़ा धमाका; ‘अमित शाह की वो बात’ लिखित में दो, तभी मानसून सत्र में देंगे साथ!…

मुंबई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री आवास ‘वर्षा’ पर हुई आधी रात की सीक्रेट बैठक के बाद आखिरकार शरद पवार की पार्टी ने परिसीमन और महिला आरक्षण बिल पर अपना सस्पेंस तोड़ दिया है। एनसीपी (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने मुंबई में एक धमाकेदार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार के सामने एक बड़ी शर्त रख दी है। सुले ने साफ कहा है कि अगर सरकार लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की शर्त को लिखित रूप में लाती है, तभी उनकी पार्टी इस ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक पर समर्थन देने पर विचार करेगी।

सुप्रिया सुले के इस बयान ने आगामी 20 जुलाई 2026 से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

‘अमित शाह का वो बयान विधेयक में क्यों नहीं?’ सुप्रिया सुले का सीधा सवाल

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रिया सुले ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लोकसभा में दिए पुराने बयान को याद दिलाते हुए सरकार को घेरा।

  • क्या है शाह का 50% मॉडल: अमित शाह ने पहले कहा था कि वे लोकसभा में 50 फीसदी सीटें बढ़ाने के पक्ष में हैं, जिससे वर्तमान 543 सीटें बढ़कर 816 हो जाएंगी। इससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान नहीं बल्कि फायदा होगा और उनके सांसदों की संख्या 129 से बढ़कर 195 हो जाएगी।
  • सुप्रिया सुले का रुख: सुले ने कहा, “अमित शाह ने सदन में बड़ी बातें कहीं थीं, लेकिन इसे मुख्य विधेयक में शामिल नहीं किया गया। पहले सरकार इसे आधिकारिक रूप से लिखित में दे, फिर हम ‘INDIA’ गठबंधन के साथियों से चर्चा कर 24 घंटे में अपना रुख साफ करेंगे।”

यू-टर्न की खबरों पर विराम: पिछली रात अजित पवार गुट के प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार गुट के जयंत पाटिल की सीएम आवास पर हुई बैठक के बाद अटकलें थीं कि शरद पवार पूरी तरह झुक गए हैं। सुप्रिया सुले ने कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्ष, संजय राउत और शरद पवार साहब से पूरी मंत्रणा करने के बाद ही यह आधिकारिक स्टैंड रख रही हैं।

महिला आरक्षण पर इतिहास न भूले सरकार

सुप्रिया सुले ने भावुक होते हुए इतिहास का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि भारत की संसद में जब महिला आरक्षण बिल एक वोट से पास हुआ था, तब हम सबने मिलकर इसे सर्वसम्मति की ओर बढ़ाया था। इस बार भी सरकार को बिना विपक्ष को भरोसे में लिए जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक नया बिल विपक्ष तक नहीं पहुंचा है, इसलिए बिना ड्राफ्ट देखे बिना शर्त समर्थन का सवाल ही नहीं उठता।

क्या फंस जाएगा मोदी सरकार का बिल?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार गुट ने ‘लिखित प्रस्ताव’ की शर्त रखकर गेंद अब केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है। चूंकि यह संविधान संशोधन विधेयक है और पिछली बार यह दो-तिहाई बहुमत न मिलने के कारण गिर गया था, ऐसे में विपक्ष को साथ लिए बिना सरकार के लिए इसे पास कराना आसान नहीं होगा। अब देखना यह है कि क्या मानसून सत्र में सरकार विपक्ष की इस 50% सीटें बढ़ाने की मांग को मानती है या नहीं।

news desk

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