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AQI 482 और भूजल में यूरेनियम 30 ppb से ऊपर… क्या देश की राजधानी पर्यावरणीय इमरजेंसी की ओर बढ़ रही है?

नई दिल्ली – राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस समय दोहरी पर्यावरणीय आपदा से जूझ रही है. एक ओर जहरीली स्मॉग की चादर शहर को ढके हुए है, वहीं दूसरी ओर भूजल में बढ़ता यूरेनियम स्तर नए स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार सुबह 9 बजे दिल्ली का औसत AQI 338 रिकॉर्ड हुआ, जबकि कुछ निजी ट्रैकर्स ने इसे 482 (Hazardous) तक दिखाया. इसी बीच, केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की वार्षिक रिपोर्ट 2025 में खुलासा हुआ कि दिल्ली भूजल यूरेनियम प्रदूषण में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है.

वायु प्रदूषण का गंभीर स्तर: NCR में हवा ‘जानलेवा’ श्रेणी में

विशेषज्ञों के अनुसार वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक कचरा, निर्माण धूल और पराली जलाने के धुएं ने PM2.5 को WHO मानकों से 7–9 गुना अधिक कर दिया है. नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद में हालात अधिक गंभीर हैं. गाजियाबाद में AQI 482 तक पहुंच गया है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ ‘जानलेवा हवा’ बताते हैं. सांस की तकलीफ, अस्थमा और हृदय रोग के मामलों में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है. IMD ने चेतावनी दी है कि कम हवा चलने के कारण अगले एक सप्ताह तक स्थिति में सुधार की संभावना कम है.

भूजल में यूरेनियम संकट: 15% नमूने BIS मानकों से ऊपर

सीजीडब्ल्यूबी की रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली के 13–15% भूजल नमूनों में यूरेनियम 30 ppb से अधिक पाया गया. उत्तर, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं. भूजल स्तर गिरने, अत्यधिक निकासी और भूगर्भीय कारणों को मुख्य जिम्मेदार बताया गया है. विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी का सेवन किडनी डैमेज, कैंसर और बच्चों में विकास संबंधी समस्याएं पैदा कर सकता है.

एनसीआर के शहरों की हालत भी बेहद गंभीर

नोएडा में AQI 362, गुरुग्राम 345, फरीदाबाद 378 और गाजियाबाद ‘Hazardous’ ज़ोन में पहुँच चुका है. बावना और नरेला जैसे औद्योगिक हॉटस्पॉट 390-400+ स्तर पर दर्ज किए गए हैं, जहाँ प्रदूषण जानलेवा माना जाता है.
सरकारी कदम और हालिया अपडेट

CAQM ने 26 नवंबर को GRAP चरण-III हटाया था, लेकिन चरण I और II के नियम अब भी लागू हैं. दिल्ली सरकार ने 91 इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन लगाईं हैं और क्लाउड-सीडिंग का ट्रायल चल रहा है. 15 नवंबर से 15 फरवरी तक सरकारी दफ्तरों के समय में बदलाव किया गया है ताकि ट्रैफिक कम हो.
IMD ने अगले 7 दिनों तक AQI ‘बहुत खराब’ रहने की चेतावनी दी है. डॉक्टरों ने नागरिकों से मास्क पहनने, बाहर कम निकलने, और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने की अपील की है. सोशल मीडिया पर लोग सख्त कदमों की मांग कर रहे हैं, जबकि प्रदूषण विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 23 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं.

news desk

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