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दिवाली आने से पहले ही दिल्ली-एनसीआर एक बार फिर से जहरीले धुएं और घनी धुंध की चादर में ढक गई है, जिसमें सांस लेना और मुश्किल हो गया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह दिल्ली के अक्षरधाम इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 426 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है.
स्थिति इतनी खराब है कि कई इलाकों में सांस लेना तक मुश्किल हो चुका है. ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गाजियाबाद के विजयनगर और गौतम बुद्ध नगर में भी हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर पर दर्ज की गई. नोएडा में जहां औसतन AQI 298 रहा, वहीं कई सेक्टरों में पीएम 2.5 और पीएम 10 की मात्रा ‘गंभीर’ श्रेणी में पाई गई. गुरुग्राम में भी हवा ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गई.
क्यों दिवाली से पहले घट जाती है दिल्ली की वायु गुणवत्ता ?
विशेषज्ञों का कहना है कि दिवाली से पहले हवा की यह स्थिति केवल पटाखों की वजह से नहीं, बल्कि कई पर्यावरणीय और मानवजनित कारणों के मेल का परिणाम है. अक्टूबर-नवंबर में हवा की गति कम होने, तापमान में गिरावट और वायुमंडलीय परतों के स्थिर होने से प्रदूषक जमीन के करीब फंस जाते हैं. इसके अलावा, पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी एनसीआर की हवा में मिलकर स्थिति को और बिगाड़ देता है.
आने वाले दिन में और खराब होगी हवा
वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली ने अनुमान जताया है कि आने वाले दिनों में प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है. इस तरह, त्योहार से पहले राजधानी एक बार फिर प्रदूषण के गंभीर संकट में फंस गई है, जहां सांस लेना तक एक चुनौती बन चुका है.
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