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Delhi Air Pollution: दमघोंटू हवा या नया ‘कोविड’? CT स्कैन में फेफड़ों की हालत देख डॉक्टर भी हैरान!

दिल्ली-एनसीआर की हवा अब सिर्फ ‘ज़हरीली’ नहीं रही, बल्कि ये हवा शरीर के अंदर वो तबाही मचा रही है जिसकी कल्पना सिर्फ महामारी के दौर में होती थी। अस्पतालों की ओपीडी से एक ऐसा डरावना ट्रेंड सामने आया है, जिसने मेडिकल एक्सपर्ट्स की नींद उड़ा दी है। डॉक्टरों का दावा है कि प्रदूषण की मार झेल रहे मरीजों के फेफड़ों का CT स्कैन बिल्कुल वैसा ही दिख रहा है, जैसा COVID-19 की दूसरी लहर के दौरान दिखता था।

फेफड़ों पर मिले ‘कोविड वाले पैचेज’
डॉक्टर्स के मुताबिक, प्रदूषण की वजह से लोगों के फेफड़ों में ‘ग्राउंड ग्लास ओपेसिटी’ (GGO) देखी जा रही है। सरल भाषा में कहें तो फेफड़ों पर सफेद धब्बे पड़ रहे हैं।

डॉक्टर्स का कहना है की जिस तरह कोरोना वायरस फेफड़ों के टिश्यूज को छलनी कर देता था, ठीक वैसे ही दिल्ली की हवा में घुले PM 2.5 के बारीक कण और ज़हरीली गैसें फेफड़ों में घुसकर गहरे जख्म और इन्फ्लेमेशन यानि फेफड़ो में सुजन पैदा कर रही हैं।

जिसका नतीजा: ऑक्सीजन सप्लाई करने की फेफड़ों की कैपेसिटी कम हो रही है। लोग बिना कुछ किए भी वैसी ही थकान और सांस की कमी महसूस कर रहे हैं, जो पोस्ट-कोविड मरीजों में देखी जाती थी।

प्रदूषण 2.0: अब लक्षण और भी गंभीर
ये अब महज़ एक आम सर्दी-खांसी नहीं है। डॉक्टरों ने इन ‘अलार्मिंग’ लक्षणों की पहचान की है:

• नॉन-स्टॉप कफ: हफ़्तों पुरानी खांसी जो कफ सिरप से भी टस से मस नहीं हो रही।

• चेस्ट कंजेशन: सीने में हर वक्त भारीपन और ऐसा महसूस होना जैसे ऑक्सीजन कम पड़ रही है।

• साइलेंट निमोनिया: बिना बुखार के भी फेफड़ों में इन्फेक्शन फैल रहा है, जो अंदर ही अंदर फेफड़ों को सड़ा रहा है।

‘नॉन-स्मोकर्स के फेफड़े भी हो रहे काले’
डॉक्टर्स का कहना है की ये किसी इमरजेंसी से कम नहीं है। हमारे पास ऐसे मरीज आ रहे हैं जिन्होंने कभी सिगरेट को हाथ तक नहीं लगाया है, लेकिन उनके फेफड़े चेन-स्मोकर्स की तरह काले और डैमेज हो चुके हैं। टॉक्सिन्स फेफड़ों को जला रहे हैं, जिससे ‘फाइब्रोसिस’ (फेफड़ों का सिकुड़ना) का खतरा बढ़ गया है।‘

कैसे बचें इस ‘गैस चैंबर’ से?
डॉक्टर्स ने इससे बचने के कुछ टिप्स बताए है जैसे:कपड़े या सर्जिकल मास्क इस बारीक ज़हर को नहीं रोक पाएंगे। सिर्फ N-95 ही काम करेगा।

• आउटडोर वर्कआउट पर ब्रेक: अगर आप सोच रहे हैं कि धुंध में दौड़ने से सेहत बनेगी, तो आप गलत हैं। यह आपके फेफड़ों को सीधे ज़हर परोसने जैसा है।

• इम्यूनिटी बूस्ट: गुड़, अदरक, तुलसी और विटामिन-C को डाइट का हिस्सा बनाएं ताकि शरीर इन टॉक्सिन्स से लड़ सके।

• एयर प्यूरीफायर: अगर घर में बुजुर्ग या बच्चे हैं, तो एयर प्यूरीफायर अब लग्जरी नहीं, ज़रूरत है।

news desk

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