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130वें संविधान संशोधन बिल पर अमित शाह ने विपक्ष को दिया जवाब, चंद्रबाबू नायडू के रूख पर सबकी नजर!

देश के गृहमंत्री अमित शाह ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करने पर विपक्ष पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि सरकार अगर कोई बिल लाती है तो उसे सदन में रखने भर से क्या दिक्कत है? उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि देश में सबसे ज्यादा सीएम तो एनडीए के ही हैं, ऐसे में यह बिल तो हमारे लिए ही परेशानी वाला हुआ. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा ऐसा कैसे हो सकता है कि जेल में ही पीएम हाउस और सीएम हाउस बन जाए ? विपक्ष द्वार जेपीसी के विरोध पर शाह ने कहा कि यदि विपक्ष बायकॉट करता है तो भी जेपीसी अपना काम करेगी.

विपक्ष क्यों कर रहा है विरोध?

विपक्ष ने हेमंत सोरेन, सत्येंद्र जैन, अरविंद केजरीवाल जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है और कहा है कि यह राज्य सरकारों को कमजोर बनाने की साजिश है. विपक्ष का आरोप है कि किसी भी आदमी के एफिडेविट के आधार पर विपक्ष के किसी भी मुख्यमंत्री को गिरफ्तार कर लिया जाता है. ऐसे में विपक्ष की सरकार को गिराने का नया तरीका इस बिल के द्वारा लाया जा रहा है.

31 जनवरी 2024 को झारखंड के तत्कालीन सीएम हेमंत सोरेन को ईडी ने तथाकथित जमीन घोटाला मामने में गिरफ्तार कर लिया था. इस मामले में 28 जून 2024 को हेमंत सोरेन को जमानत मिली. जमानत देते समय कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि ‘ED का पूरा मामला गवाहों के बयानों पर आधारित है, लेकिन उनमें से किसी ने भी यह साबित नहीं किया कि हेमंत सोरेन ने कोई अपराध किया’.

जेपीसी का बहिष्कार

संसद में बिल पेश करने के दौरान विपक्ष ने काफी हंगामा किया था. जिसके बाद बिल को जेपीसी के लिए भेज दिया गया. कुछ बड़े विपक्षी दलों जैसे सपा और तृणमूल कांग्रेस ने जेपीसी का बहिष्कार किया है, वहीं कांग्रेस का कहना है कि वह इसमें शामिल होकर बिल संबंधी अपनी आपत्तियों को उठायेगी.

क्या है 130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025

130वां संविधान संशोधन विधेयक, 2025 में प्रावधान है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या राज्य/केंद्र शासित प्रदेश का कोई मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है, तो उन्हें पद से हटा दिया जाएगा.

आमतौर पर परंपरा रही है कि गिरफ्तारी होते ही इस्तीफा दे दिया जाता है. लेकिन दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी के फौरन बाद इस्तीफा नहीं दिया था. वहीं सूत्रों की माने तो इस बिल पर नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू जैसे NDA गठबंधन के नेता भी असमंजस में हैं.

news desk

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