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दूषित पानी से मौतों पर सवालों के घेरे में ‘स्वच्छ’ इंदौर, 300 शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाना जाने वाला इंदौर इन दिनों गंभीर वजहों से सुर्खियों में है। यहां दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत की खबरों ने प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार भले ही कार्रवाई की बात कर रही हो, लेकिन इस मामले में सामने आए खुलासे बेहद चौंकाने वाले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हादसा सिस्टम की बड़ी नाकामी का नतीजा बताया जा रहा है। आरोप है कि नगर निगम को 300 से अधिक शिकायतें मिलीं, इसके बावजूद समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हालात लगातार बिगड़ते चले गए और अब तक इस मामले में आठ लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कई लोग अब भी अस्पतालों में भर्ती हैं और जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से यह भी सामने आया है कि भागीरथपुरा क्षेत्र (जोन-4) में ही 23 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। स्थानीय लोगों ने बार-बार अधिकारियों को बताया कि नलों से आने वाला पानी गंदा, बदबूदार और पीने के लायक नहीं है, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि ज़मीनी स्तर पर कदम उठाने के बजाय समस्या का समाधान सिर्फ फाइलों तक सीमित रखा गया।

बताया जा रहा है कि नई पाइपलाइन बिछाने का प्रस्ताव वर्ष 2022 से फाइलों में लंबित है, लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हो पाया। लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि हालात काबू से बाहर हो गए और लोगों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी।

भागीरथपुरा में गंदे पानी की समस्या कोई नई नहीं है। इसकी जड़ें वर्ष 2022 में दर्ज हुई शुरुआती शिकायतों से जुड़ी हैं, जब पहली बार नर्मदा जल लाइन बदलने का प्रस्ताव फाइलों में दर्ज किया गया था। इसके बाद 2023, 2024 और 2025 तक यह मामला सिर्फ कागज़ी कार्रवाई तक सीमित रहा और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस सुधार नहीं किया गया।

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हाल ही में नल के पानी में सीवरेज मिल जाने से गंभीर स्थिति पैदा हो गई। दूषित पानी के सेवन से जलजनित बीमारियां फैल गईं, जिससे बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़ गए। स्थानीय लोग लंबे समय से गंदे पानी की शिकायत करते रहे, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। जांच में पानी के दूषित होने की पुष्टि भी हो चुकी है।

प्रशासन के मुताबिक अब तक इस मामले में 8 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें से 4 मौतों का सीधा संबंध दूषित पानी पीने से बताया गया है, जबकि शेष 4 मामलों को प्राकृतिक मृत्यु माना गया है। इस घटना ने नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालात बिगड़ने और जान-माल का नुकसान हो जाने के बाद अब प्रशासन ने समानांतर पाइपलाइन डालने, लीकेज सुधारने और जल आपूर्ति व्यवस्था दुरुस्त करने का काम शुरू करने का दावा किया है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में स्थिति सामान्य कर दी जाएगी और पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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