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एक मुस्लिम को टिकट देने वाले चिराग उठा रहे आरजेडी पर सवाल! मुकेश साहनी ने कहा – ‘शाहनवाज की फिक्र करें…’

बीते गुरुवार को इंडिया गठबंधन की ओर से हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार के अगले मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में तेजस्वी यादव और उपमुख्यमंत्री पद के लिए वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी के नामों की घोषणा के बाद एनडीए उन पर हमलावर हो गया है. एनडीए के मुख्य घटक दल लोजपा(आर) के प्रमुख चिराग पासवान ने आरजेडी पर मुस्लिम नेतृत्व की अनदेखी और वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाया है.

चिराग पासवान ने आरजेडी पर साधा निशाना

इंडिया गठबंधन की घोषणा के तुरंत बाद एनडीए ने इस फैसले को मुस्लिमों की अनदेखी करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. लोजपा(आर) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने आरोप लगाया कि ‘आरजेडी मुस्लिमों के नाम पर राजनीति तो करती है, लेकिन उन्हें वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं देती.’ चिराग ने कहा, ‘मुस्लिमों की बात करेंगे, लेकिन जब प्रतिनिधित्व की बात आएगी तो रिप्रजेंटेशन नहीं देंगे. मुसलमान इनके लिए सिर्फ वोटबैंक हैं.’

चिराग के आरोपों से लगता है कि बिहार में मुस्लिम प्रतिनिधित्व वाकई कम है. अब जबकि विधानसभा चुनाव के लिए सभी उम्मीदवारों का नामाकंन हो चुका है तो एक नजर डालते हैं उम्मीदवारों के नाम पर. आखिर किस पार्टी ने कितने मुस्लिमों को टिकट दिया है.

किस दल ने कितने मुस्लिमों को दिया टिकट?

महागठबंधन के प्रवक्ताओं ने कहा कि जो आरजेडी पर मुस्लिमों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं, उनकी अपनी पार्टियों का रिकॉर्ड देखना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया कि चिराग पासवान की लोजपा ने इस चुनाव में केवल एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट दिया है.जेडीयू ने भी अपने उम्मीदवारों में केवल चार मुस्लिम चेहरों को शामिल किया है.
वहीं दूसरी ओर, महागठबंधन ने अपनी ओर से आंकड़े पेश करते हुए बताया कि आरजेडी ने इस बार 19 मुस्लिम उम्मीदवार, जबकि कांग्रेस ने 10 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया है. यानी कुल मिलाकर 29 मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है.

वहीं मुकेश साहनी ने बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा कि ‘अल्पसंख्यकों की फिक्र हम करेंगे. आप चिंता मत कीजिए. आप अपने नेता शाहनवाज हुसैन के बारे में फिक्र कीजिए. देश के अल्पसंख्यकों की चिंता कीजिए.’

बिहार चुनावों में क्या पड़ेगा असर ?

तो अब सवाल उठता है कि जब चिराग के कोटे में 29 सीटें आईं तो उन्होने सिर्फ 1 मुस्लिम को टिकट दिया. ऐसे में उनके द्वारा दूसरे दलों पर मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाना क्या बिहार विधानसभा चुनाव को हिंदू मुस्लिम की राजनीति में उलझाना भर है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में मुस्लिम मतदाता लगभग 19 प्रतिशत हैं और किसी भी गठबंधन के लिए सत्ता का रास्ता उनसे होकर ही गुजरता है. ऐसे में महागठबंधन की घोषणा सिर्फ जातीय समीकरणों को नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक संतुलन को भी साधने की एक रणनीतिक कोशिश के रूप में देखी जा रही है.

news desk

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