Trending News

चीन में महंगाई ने पकड़ी रफ्तार, तीन साल के उच्च स्तर पर CPI –  क्या भारत के निर्यात को मिल सकते हैं नए मौके ?

नई दिल्ली: चीन की अर्थव्यवस्था से फरवरी 2026 के लिए आए ताजा आंकड़ों ने वैश्विक बाजारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। चीन के नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (NBS) के अनुसार फरवरी में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत बढ़ गया। जनवरी में यह आंकड़ा केवल 0.2 प्रतिशत था, यानी एक ही महीने में महंगाई की रफ्तार काफी तेज हो गई। यह जनवरी 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। खास बात यह है कि बाजार के विशेषज्ञों ने केवल 0.8 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान लगाया था, लेकिन वास्तविक आंकड़े उससे ज्यादा निकले।

मासिक आधार पर भी कीमतों में बड़ा उछाल देखने को मिला। फरवरी में CPI करीब 1 प्रतिशत बढ़ा, जो फरवरी 2024 के बाद का सबसे बड़ा मासिक उछाल है। इसका मतलब यह है कि चीन में उपभोक्ताओं का खर्च बढ़ रहा है और बाजार में गतिविधि फिर से तेज होती दिख रही है।

लूनर न्यू ईयर की छुट्टियों से बढ़ा खर्च

विशेषज्ञों के मुताबिक इस बार महंगाई बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह चंद्र नववर्ष यानी लूनर न्यू ईयर की लंबी छुट्टियां हैं। इस साल चीन में यह छुट्टियां करीब 9 दिनों तक चलीं, जो पिछले साल से ज्यादा लंबी थीं। इस दौरान लोगों ने घरेलू यात्रा, होटल, रेस्तरां, मनोरंजन और सिनेमा पर खूब खर्च किया।

इसका असर यह हुआ कि सेवा क्षेत्र की कीमतें करीब 1.1 प्रतिशत तक बढ़ गईं। इसके अलावा पालतू जानवरों की देखभाल, वाहन रखरखाव और अन्य सेवाओं में भी खर्च बढ़ा। खाद्य वस्तुओं में भी हल्की तेजी देखने को मिली, खासकर ताजी सब्जियों और पोर्क की कीमतों में सुधार हुआ।

भारत के लिए क्यों अहम है यह बदलाव

कोर CPI, जिसमें खाद्य और ऊर्जा को शामिल नहीं किया जाता, फरवरी में 1.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। यह मार्च 2019 के बाद सबसे तेज वृद्धि मानी जा रही है। हालांकि दूसरी तरफ उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) अभी भी गिरावट में है। फरवरी में PPI -0.9 प्रतिशत रहा, हालांकि यह जनवरी के -1.4 प्रतिशत से बेहतर है। यह लगातार 41वां महीना है जब चीन के फैक्ट्री गेट प्राइस नकारात्मक क्षेत्र में हैं, लेकिन गिरावट की रफ्तार अब कम होती दिख रही है।

चीन की अर्थव्यवस्था में यह बदलाव भारत के लिए भी मायने रखता है, क्योंकि चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। अगर चीन में उपभोक्ता मांग बढ़ती है तो भारत के निर्यात को फायदा मिल सकता है। खासकर रसायन, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टर को इससे लाभ मिल सकता है।

कुल मिलाकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े चीन की अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार के शुरुआती संकेत दे रहे हैं। अगर आने वाले महीनों में मांग और मजबूत होती है तो इसका फायदा भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों और व्यापार जगत की नजर चीन की अगली आर्थिक नीतियों और वैश्विक बाजार की दिशा पर टिकी हुई है।

news desk

Recent Posts

HONDA ने इंडियन मार्किट में उतारी अपनी ‘E-Clutch’ टेक्नोलॉजी, नई प्रीमियम मोटरसाइकिलों की रेंज को किया लॉन्च

“होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया” ने भारतीय प्रीमियम टू-व्हीलर मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करते…

12 hours ago

महाराष्ट्र से बंगाल तक महाउलटफेर की आहट! उद्धव गुट के 6 सांसदों के पाला बदलने की चर्चा तेज, जानिए पूरा गणित

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजों ने देश की सियासत का रुख पूरी तरह बदल दिया…

13 hours ago

करियर बनाने का झांसा देकर नाबालिग खिलाड़ी से 3 साल तक करता रहा दुष्कर्म, फुटबॉल कोच गिरफ्तार

खेल के मैदान से एक बार फिर कोच सुर स्टूडेंट के पवित्र रिश्ते को कलंकित…

14 hours ago

बंदिशों की दीवारें तोड़कर IMA से पास आउट हुआ बेटियों का पहला ऐतिहासिक बैच! देश को मिलीं 9 जांबाज सैन्य अफसर

भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून का इस वर्ष का पासिंग आउट समारोह कई मायनों में…

17 hours ago

बंगाल में फिर गरमाया सियासी पारा! ED की रडार पर TMC विधायक मदन मित्रा, ठिकानों पर शुरू हुई  छापेमारी

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। ED ने तृणमूल कांग्रेस (TMC)…

18 hours ago