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‘चंपत राय को मिला धोखा, पर लापरवाही थी गंभीर’- राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष का बड़ा बयान, प्रबंधन में होंगे व्यापक बदलाव

राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार; गोविंद देव गिरि बोले- “राय बेदाग हैं, लेकिन उन्होंने गलत लोगों पर भरोसा किया।”

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर चल रहे सियासी और प्रशासनिक घमासान के बीच एक नया मोड़ आ गया है। सोमवार (7 जुलाई, 2026) को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया, जबकि कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने खुलकर बात की। उन्होंने चंपत राय का बचाव करते हुए इस पूरे घटनाक्रम को ‘अपनों के विश्वासघात’ का नतीजा बताया है, हालांकि उन्होंने प्रबंधन के स्तर पर हुई गंभीर लापरवाही को भी स्वीकार किया।

‘चंपत राय के साथ हुआ विश्वासघात’

बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के किसी आंतरिक सदस्य ने गद्दारी नहीं की, बल्कि चंपत राय खुद धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं।

“चंपत राय जी एक अत्यंत सज्जन व्यक्ति हैं। उनकी एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने गलत लोगों पर भरोसा किया और उन्हें बरसों अपने साथ रखा। उन्हीं लोगों ने ट्रस्ट की पीठ में छुरा घोंपा है। हमारी नजर में राय की छवि आज भी बिल्कुल बेदाग है।” – गोविंद देव गिरि, कोषाध्यक्ष, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

लापरवाही पर दो-टूक: ‘इतनी लंबी निगरानीहीनता गंभीर मामला’

एक तरफ जहां गोविंद देव गिरि ने चंपत राय के चरित्र का बचाव किया, वहीं उन्होंने मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन को लेकर आत्मनिरीक्षण भी किया। उन्होंने साफ शब्दों में माना कि इस पूरे मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा की तरफ से बड़ी लापरवाही हुई है। गिरि ने कहा, “इतनी लंबी अवधि तक चढ़ावे की पर्याप्त निगरानी न होना बेहद गंभीर मामला है। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए था।”

उन्होंने यह भी पुष्टि की कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी तो हुई है, लेकिन गबन कितना बड़ा है और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार हैं, इसका सटीक फैसला एसआईटी (SIT) की अंतिम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगा।

मीडिया के सामने पेश किए गए ‘गायब’ सबूत

विवाद के बीच अफवाहों और आरोपों पर विराम लगाने के लिए ट्रस्ट ने मीडिया के सामने उन पांच बहुमूल्य वस्तुओं को प्रदर्शित किया, जिनके चोरी होने की खबरें उड़ रही थीं। इनमें रामचरितमानस की एक दुर्लभ पांडुलिपि और भगवान राम को अर्पित एक भव्य हार शामिल हैं। गिरि ने बताया कि कुल 2,800 मूल्यवान वस्तुओं का एक विस्तृत रजिस्टर तैयार है और सभी चीजें पूरी तरह सुरक्षित हैं।

वीआईपी दर्शन के नाम पर वसूली के आरोप ‘विश्वसनीय’

जब कोषाध्यक्ष से मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर अवैध धन वसूली के आरोपों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने चौंकाने वाला बयान दिया। गिरि ने कहा, “मैंने भी ऐसे आरोप सुने हैं और वो मुझे काफी हद तक विश्वसनीय प्रतीत होते हैं। हालांकि, मेरे सामने अभी तक कोई विशिष्ट नाम नहीं आया है।”

अब आगे क्या? मंदिर प्रबंधन का होगा ‘ओवरहॉल’

इस विवाद से सबक लेते हुए ट्रस्ट ने अब अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और सुरक्षा के प्रबंधन को पूरी तरह बदलने का फैसला किया है।

  • जांच और कार्रवाई: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर नकदी और कीमती सामान की गिनती से जुड़े 8 लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अंतिम रिपोर्ट आने पर दोषियों को कड़ी सजा दी जाएगी।
  • नया सिस्टम: भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो, इसके लिए चढ़ावे की मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक व आधुनिक तकनीकी बदलाव किए जाएंगे।

कैसे शुरू हुआ था पूरा विवाद?

यह विवाद पिछले महीने 7 जून को तब गरमाया था, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन का मुद्दा उठाया था। शुरुआत में इन आरोपों को खारिज करने के बाद, जब सरकारी जांच (SIT) में गड़बड़ियां पाई गईं और गिरफ्तारियां हुईं, तो नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे अब ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है।

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