नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना दिवस का शताब्दी समारोह धूमधाम से मनाया गया. रेशमबाग मैदान में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत और पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मौजूद रहे. कार्यक्रम की शुरुआत परंपरागत रूप से शस्त्र पूजा के साथ हुई, जिसे सरसंघचालक मोहन भागवत ने संपन्न किया. पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में विजयादशमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ‘नागपुर की धरती पर मेरे जीवन को आकार देने वाले दो महापुरुष रहे हैं, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और बाबा साहब भीमराव आंबेडकर’. उन्होंने संघ के संस्थापक हेडगेवार से लेकर वर्तमान सरसंघचालक मोहन भागवत तक की यात्रा में सभी सरसंघचालकों के योगदान का उल्लेख किया.
इससे पहले मोहन भागवत और रामनाथ कोविंद ने संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और संघ की पारंपरिक प्रार्थना में भाग लिया. कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई दिग्गज नेता मौजूद रहे. सरसंघचालक मोहन भागवत ने इस अवसर पर रामनाथ कोविंद का औपचारिक स्वागत भी किया. संघ के इस वार्षिक विजयादशमी उत्सव में इस बार 21 हजार स्वयंसेवकों की उपस्थिति रही, जिससे समारोह का भव्य दृश्य देखने को मिला. इसी के साथ संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर वर्ष भर चलने वाले आयोजनों की शुरुआत भी कर दी गई है. संघ ने इन आयोजनों की विस्तृत रूपरेखा पहले ही तैयार कर ली है.
पहलगाम हमले पर टिप्पणी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने अपने भाषण में पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा कि ‘इस हमले में आतंकियों ने लोगों की पहचान धर्म पूछकर की और फिर निर्दोष हिंदुओं की हत्या की’. भागवत के मुताबिक, इस घटना का करारा जवाब भारत सरकार और सेना ने पूरी तैयारी के साथ दिया, जिससे साफ हो गया कि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में हमें हमेशा चौकन्ना रहना होगा और यह समझना होगा कि असली साथी कौन हैं और दुश्मन कौन.