चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों से जुड़ी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। इसी बीच कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
दिपके ने कहा है कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं तो उनकी पार्टी 2 अक्टूबर से मुंबई में प्रदर्शन शुरू करेगी, जिसे बाद में देश के दूसरे शहरों तक ले जाने की बात कही गई है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है जब चुनाव आयोग के दो अन्य सदस्यों की ओर से पिछले 10 महीनों में कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का समय दिया गया था। दिपके के मुताबिक समयसीमा के भीतर इस्तीफा नहीं होने पर 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा।
दिपके ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हालांकि, उनके कई दावे राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया कि ये आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, नए मतदाताओं के लिए Form 6 में बदलाव, वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण और SIR से जुड़े मुद्दों पर थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए जाने पर सवाल उठाए। इनमें से कुछ आपत्तियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने चुनावी रोल के IT सिस्टम और उसके नियंत्रण को लेकर चिंता जताई थी। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने चुनावी डेटा और IT व्यवस्था में बदलाव को लेकर कैबिनेट सचिव को भी पत्र लिखा था।
विवाद का एक अहम हिस्सा नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव से जुड़ा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक Form 6 में SIR से संबंधित एक घोषणा जोड़ी गई थी, जिसमें आवेदक से उसके या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पिछले SIR की मतदाता सूची में होने से संबंधित जानकारी मांगी गई।
रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी और कहा था कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए नियमों में संशोधन की जरूरत है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग के सूत्रों ने इन घटनाक्रमों को अलग तरीके से पेश किया। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार आयोग के सूत्रों ने कहा कि SIR समेत चुनाव आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए थे और आयोग के फैसले सर्वसम्मति से हुए। आयोग ने रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा बताया।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक भी 14 आपत्तियों के बावजूद आयोग ने कई मौकों पर संयुक्त रूप से प्रेस ब्रीफिंग की और सार्वजनिक तौर पर एक साथ काम करता दिखाई दिया।
यानी विवाद का मुख्य बिंदु अब यही है कि चुनाव आयोग के भीतर दर्ज की गई आपत्तियों को किस रूप में देखा जाए—क्या ये सामान्य आंतरिक विचार-विमर्श का हिस्सा थीं या फिर आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर मतभेद का संकेत।
मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर पहले से ही विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद चल रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार बिहार से शुरू हुई SIR प्रक्रिया के विस्तार के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ड्राफ्ट मतदाता रिकॉर्ड में 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए। यह आंकड़ा ड्राफ्ट रोल से संबंधित है और नाम हटाए जाने का अर्थ हर मामले में स्थायी रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है।
इसी प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम, अपील और नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इसी माहौल में CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है।
हालांकि, CJP के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने विपक्षी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है, तो उसे चुनावों में भाग लेने के अपने रुख पर भी विचार करना चाहिए।
दिपके ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कई राजनीतिक दावे भी किए हैं, लेकिन इन दावों और अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में कथित वोट कटौती के आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
CJP के ऐलान के मुताबिक यदि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर को मुंबई से विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। पार्टी ने इसे बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाने की बात कही है।
इस पूरे विवाद के बीच अब नजर चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया और SIR से जुड़े प्रशासनिक फैसलों पर है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों को लेकर आगे कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या दस्तावेज सार्वजनिक होता है या नहीं।
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