मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और विपक्ष का विरोध अब सड़क से संसद तक पहुंचने की तैयारी में है। कांग्रेस ने 28 सितंबर से विरोध प्रदर्शन, 29 सितंबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक और 30 सितंबर को INDIA गठबंधन की बैठक के जरिए चुनाव आयोग के मुद्दे को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। विपक्षी दल पहले ही ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की संभावना पर चर्चा कर चुके हैं।
कांग्रेस सोमवार 28 सितंबर को देशभर के जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की तैयारी में है। पार्टी की मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे से जुड़ी है। अलग-अलग राज्यों में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन करेंगे।
झारखंड समेत कई राज्यों की कांग्रेस इकाइयों ने भी जिला स्तर पर विरोध कार्यक्रमों का ऐलान किया है।
पार्टी इस अभियान में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर उठाए जा रहे सवालों को प्रमुखता से उठाएगी।
कांग्रेस के कार्यक्रम का अगला चरण 29 सितंबर को होगा। सुबह 10:30 बजे नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक प्रस्तावित है।
बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे करेंगे। इसमें राहुल गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
इसके बाद 30 सितंबर को INDIA गठबंधन की प्रस्तावित बैठक होनी है। इस बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और विपक्ष की आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।
विपक्षी दल पहले ही ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए संसद में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी कर रहे हैं। 24 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों की ओर से नया नोटिस दोनों सदनों में देने की तैयारी की जा रही थी।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों की गतिविधियां पहले से जारी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 24 अप्रैल को 73 विपक्षी सांसदों की ओर से राज्यसभा में दिया गया एक नोटिस पहले से लंबित है। अब विपक्ष नए घटनाक्रमों के बाद नया नोटिस देने पर भी विचार कर रहा है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर दूसरे विपक्षी दलों से भी संपर्क किया है। हालांकि महाभियोग की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए संसद में जरूरी समर्थन और संवैधानिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
इस बीच केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन के एक दावे ने विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। थॉमसन ने कहा है कि 2016 में एक फ्लाइट के दौरान तत्कालीन IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार ने उन्हें 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर पथानामथिट्टा से चुनाव लड़ने का सुझाव दिया था। थॉमसन के मुताबिक उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार थॉमसन ने इसे चुनाव लड़ने का एक सुझाव बताया है, न कि औपचारिक राजनीतिक प्रस्ताव।
इस दावे पर ज्ञानेश कुमार की ओर से कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल इसे थॉमसन के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने इस दावे को लेकर ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस का आरोप है कि ऐसे घटनाक्रम चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े करते हैं।
वहीं, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए।
फिलहाल कांग्रेस ने इस विवाद को तीन स्तरों पर आगे बढ़ाने की तैयारी की है—जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, CWC की बैठक और INDIA गठबंधन के साथ रणनीति। इसके साथ ही संसद में महाभियोग नोटिस की संभावित कार्रवाई पर भी विपक्ष की नजर है।
आने वाले दिनों में यह विवाद केवल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली तक सीमित रहता है या संसद की कार्रवाई का मुद्दा बनता है, यह विपक्षी दलों की अगली रणनीति और संसद में उनके समर्थन पर निर्भर करेगा।
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