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CBI ChargeSheet on NEET-UG Paper Leak: NTA के ही एक्सपर्ट्स निकले गुनहगार, प्रिंटिंग प्रेस से नहीं बल्कि यहां से लीक हुआ था प्रश्नपत्र

NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस या स्ट्रॉन्ग रूम से चोरी नहीं हुआ, बल्कि NTA से जुड़े विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) ने ही इस लीक कांड को अंजाम दिया था।

कैसे हुआ इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश?

सीबीआई द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, परीक्षा प्रणाली के भीतर बैठे लोगों ने ही भरोसे को तोड़ा।

  • विशेषज्ञों का दुरुपयोग: NTA जिन विषय विशेषज्ञों को पेपर तैयार करने और उसकी समीक्षा की जिम्मेदारी सौंपता है, उन्हीं में से कुछ एक्सपर्ट्स ने गोपनीयता की धज्जियां उड़ाते हुए प्रश्नों को लीक कर दिया।
  • प्रिंटिंग प्रेस थ्योरी खारिज: अब तक यह कयास लगाए जा रहे थे कि प्रश्नपत्र प्रिंटिंग प्रेस या परिवहन के दौरान लीक हुआ था, लेकिन सीबीआई जांच ने साफ कर दिया कि सेंधमारी सीधे सोर्स (Source Level) से ही हुई थी।

सुरक्षा तंत्र पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की आंतरिक सुरक्षा, विशेषज्ञों के चयन और गोपनीयता बनाए रखने वाले प्रोटोकॉल पर सवाल उठ रहे हैं:

  1. आंतरिक निगरानी में चूक: जिन अधिकारियों/विशेषज्ञों पर पेपर की पूरी गोपनीयता बनाए रखने का जिम्मा था, उन पर संस्था का कोई प्रभावी नियंत्रण नहीं था।
  2. परीक्षा की विश्वसनीयता: लाखों उम्मीदवारों के भविष्य से जुड़ी देश की इस सबसे बड़ी परीक्षा की पारदर्शिता पर इस खुलासे के बाद गहरा धक्का लगा है।

सीबीआई अब इस मामले में शामिल सभी दोषी विशेषज्ञों और उनसे लाभ उठाने वाले माफिया तंत्र के खिलाफ कठोर धाराओं में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क था। इस हाई-प्रोफाइल साजिश में परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अंदरूनी लोग, कोचिंग संचालक, दलाल और बिचौलिए सीधे तौर पर शामिल थे।

सीबीआई ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। हालांकि, कुछ तकनीकी खामियों के कारण अदालत ने अभी इस पर औपचारिक संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया है।

महीनों पहले रची गई थी पेपर लीक की साजिश

सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह साजिश परीक्षा से ठीक पहले नहीं, बल्कि कई महीने पहले से रची जा रही थी। नेटवर्क का मुख्य मकसद गोपनीय प्रश्नपत्रों को परीक्षा से पहले ही बाहर निकालकर चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाना था।

NTA के 3 विषय विशेषज्ञों (Experts) की मुख्य भूमिका

चार्जशीट में NTA द्वारा नियुक्त तीन प्रमुख विषय विशेषज्ञों – बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के एक्सपर्ट्स को आरोपी बनाया गया है।

  • आधिकारिक पद का दुरुपयोग: इन विशेषज्ञों को परीक्षा से काफी पहले ही नेटवर्क में शामिल कर लिया गया था। उन्होंने अपने पद का इस्तेमाल कर गोपनीय प्रश्नपत्रों तक पहुंच बनाई।
  • ₹25 लाख का लेन-देन: जांच में पता चला कि आरोपी शुभम खैरनार ने धनंजय लोखंडे को ₹25 लाख देकर लीक प्रश्नपत्र हासिल किए थे। लोखंडे को यह पेपर मनीषा संजय वाघमारे से मिला था, जिसका सीधा संपर्क NTA के केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रह्लाद कुलकर्णी से था। (कुलकर्णी ने कथित तौर पर केमिस्ट्री पेपर के मराठी से अंग्रेजी बैक-ट्रांसलेशन का काम किया था)।
  • छात्रों को ₹4 लाख में ऑफर: अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों को ₹4 लाख में लीक पेपर देने की पेशकश की गई थी। सीबीआई को आशंका है कि एक विशेषज्ञ ने लीक सवालों पर चर्चा के लिए अलग से ऑफलाइन रिवीजन क्लास भी लगाई थी।

Telegram, WhatsApp और PDF से फैलाया गया पेपर

सीबीआई के अनुसार, लीक प्रश्नपत्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाया गया:

  • डिजिटल सबूत: आरोपी यश यादव के फोन से लीक NEET प्रश्नों की PDF फाइल और Telegram चैट बरामद की गई है।
  • व्हाट्सएप ग्रुप: जांचकर्ताओं को आरोपियों के मोबाइल में ‘NEET 2026’ नाम का एक व्हाट्सएप ग्रुप और ‘AP Broker’ नाम से सेव संपर्क (शुभम मधुकर खैरनार) मिला है।
  • सिक्योरिटी के लिए जब्त किए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट्स: भुगतान की गारंटी के लिए अभ्यर्थियों की 10वीं-12वीं की मूल अंकसूची, प्रमाणपत्र और हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक जमा कराए गए थे, जिन्हें सीबीआई ने जब्त कर लिया है।

कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई

सीबीआई ने इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और नए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत केस दर्ज किया है।

इलेक्ट्रॉनिक और फोरेंसिक सबूतों (CDR, मोबाइल डेटा, डिजिटल चैट्स) को इस केस का मुख्य आधार बनाया गया है। सीबीआई फिलहाल चार्जशीट की तकनीकी कमियों को दूर करने और नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की तलाश में जुटी है।

news desk

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