NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पेपर किसी प्रिंटिंग प्रेस या स्ट्रॉन्ग रूम से चोरी नहीं हुआ, बल्कि NTA से जुड़े विषय विशेषज्ञों (Subject Experts) ने ही इस लीक कांड को अंजाम दिया था।
सीबीआई द्वारा अदालत में दाखिल चार्जशीट के अनुसार, परीक्षा प्रणाली के भीतर बैठे लोगों ने ही भरोसे को तोड़ा।
इस खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की आंतरिक सुरक्षा, विशेषज्ञों के चयन और गोपनीयता बनाए रखने वाले प्रोटोकॉल पर सवाल उठ रहे हैं:
सीबीआई अब इस मामले में शामिल सभी दोषी विशेषज्ञों और उनसे लाभ उठाने वाले माफिया तंत्र के खिलाफ कठोर धाराओं में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है। एजेंसी के अनुसार, यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं बल्कि कई राज्यों में फैला एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क था। इस हाई-प्रोफाइल साजिश में परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अंदरूनी लोग, कोचिंग संचालक, दलाल और बिचौलिए सीधे तौर पर शामिल थे।
सीबीआई ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। हालांकि, कुछ तकनीकी खामियों के कारण अदालत ने अभी इस पर औपचारिक संज्ञान (Cognizance) नहीं लिया है।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि यह साजिश परीक्षा से ठीक पहले नहीं, बल्कि कई महीने पहले से रची जा रही थी। नेटवर्क का मुख्य मकसद गोपनीय प्रश्नपत्रों को परीक्षा से पहले ही बाहर निकालकर चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाना था।
चार्जशीट में NTA द्वारा नियुक्त तीन प्रमुख विषय विशेषज्ञों – बॉटनी, केमिस्ट्री और फिजिक्स के एक्सपर्ट्स को आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई के अनुसार, लीक प्रश्नपत्रों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाया गया:
सीबीआई ने इस पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) और नए Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024 के तहत केस दर्ज किया है।
इलेक्ट्रॉनिक और फोरेंसिक सबूतों (CDR, मोबाइल डेटा, डिजिटल चैट्स) को इस केस का मुख्य आधार बनाया गया है। सीबीआई फिलहाल चार्जशीट की तकनीकी कमियों को दूर करने और नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की तलाश में जुटी है।
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