भारत दौरे पर आए कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney का प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गर्मजोशी से स्वागत किया। जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान माहौल काफी सकारात्मक और आत्मीय नजर आया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्नी के तौर पर यह उनकी पहली भारत यात्रा है और दोनों देश इसे रिश्तों में एक अहम माइलस्टोन मानते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल कनाडा में हुई G7 बैठक में कार्नी ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का जिस अपनापन के साथ स्वागत किया था, आज भारत भी उसी भावना के साथ उनका स्वागत कर रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्कुराते हुए यह भी कहा कि दुनिया में बहुत कम ऐसे नेता हैं, जिनके प्रोफाइल में दो देशों की सेंट्रल बैंकिंग लीडरशिप का अनुभव दर्ज हो। पहली ही बैठक से दोनों नेताओं के बीच भरोसे, सकारात्मकता और नई ऊर्जा का एहसास हुआ, जिसका असर बातचीत के हर मुद्दे पर दिखा।
व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी में ‘नेक्स्ट लेवल’ साझेदारी
दोनों देशों ने भारत–कनाडा रिश्तों को “नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप” में बदलने पर सहमति जताई। लक्ष्य है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाए। इसके लिए Comprehensive Economic Partnership Agreement को जल्द अंतिम रूप देने का फैसला लिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि कनाडा के पेंशन फंड्स पहले ही भारत में करीब 100 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं, जो भारत की ग्रोथ स्टोरी में उनके भरोसे को दिखाता है।
टेक्नोलॉजी और इनोवेशन को लेकर भी दोनों देश खुद को नेचुरल पार्टनर मानते हैं। AI, क्वांटम, सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। हाल ही में भारत में हुए AI Impact Summit में कनाडा के योगदान की भी सराहना की गई। Critical Minerals पर हुए MOU से सप्लाई चेन मजबूत होगी, जबकि स्पेस सेक्टर में स्टार्टअप्स और इंडस्ट्री को जोड़ने की योजना है।
ऊर्जा, सुरक्षा और लोगों से लोगों के रिश्तों पर फोकस
ऊर्जा के क्षेत्र में बातचीत काफी अहम रही। हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्टोरेज पर फोकस करने वाली “नेक्स्ट जेनरेशन एनर्जी पार्टनरशिप” की रूपरेखा रखी गई। भारत ने कनाडा के International Solar Alliance और Global Biofuel Alliance से जुड़ने के फैसले का स्वागत किया। इस साल India–Canada Renewable Energy and Storage Summit आयोजित करने का भी ऐलान हुआ। इसके अलावा सिविल न्यूक्लियर एनर्जी में दीर्घकालिक यूरेनियम सप्लाई डील और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर मिलकर काम करने पर सहमति बनी।
रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ते सहयोग को आपसी विश्वास की परिपक्वता का संकेत बताया गया। डिफेंस इंडस्ट्री, मेरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और मिलिट्री एक्सचेंज को आगे बढ़ाने के लिए India–Canada Defence Dialogue शुरू करने का फैसला लिया गया।
पीपल-टू-पीपल रिश्तों को दोनों देशों ने अपनी असली ताकत बताया। AI, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और इनोवेशन में यूनिवर्सिटीज के बीच नई पार्टनरशिप की घोषणा हुई है। साथ ही कनाडा की यूनिवर्सिटीज के भारत में कैंपस खोलने पर भी सहमति बनी। इंडीजीनस और ट्राइबल कम्युनिटीज से जुड़े सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए एक नया MOU भी साइन किया गया।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कनाडा को भारत ने अहम साझेदार बताया और Indian Ocean Rim Association में डायलॉग पार्टनर बनने की उसकी रुचि का स्वागत किया। आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ मिलकर काम करने पर भी जोर दिया गया। पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान की बात दोहराई।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री कार्नी की यह भारत यात्रा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं रही, बल्कि भारत–कनाडा रिश्तों को नई दिशा और नई रफ्तार देने वाली साबित हुई।