आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सेहतमंद रहने के लिए लोग अपनी डाइट में फ्रूट जूस को खास जगह देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस जूस को आप अपनी सेहत का खजाना समझ रहे हैं, वो जूस आपके ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल के लिए कितना ख़तरनाक हो सकता है? हालिया रिपोर्ट्स में फ्रूट जूस और हाई ब्लड प्रेशर के बीच के कॉम्बिनेशन को लेकर कुछ चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने आए हैं।
जूस और साबुत फल: जमीन-आसमान का अंतर
एक्सपर्ट्स के अनुसार, फल को खाना और उसका जूस पीना, शरीर पर बिल्कुल अलग तरह से असर डालता है।
फाइबर का नुकसान: जब हम फल का जूस निकालते हैं, तो उसमें मौजूद ज़रूरी फाइबर बाहर निकल जाता है।

फाइबर की एब्सेंस में जूस सिर्फ एक ‘शुगर वाला लिक्विड’ बनकर रह जाता है। बिना फाइबर के शरीर में शुगर बहुत तेजी से एब्जॉर्ब होती है, जिससे ब्लड शुगर लेवल अचानक बढ़ सकता है।
क्या वाकई बढ़ता है ब्लड प्रेशर?
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है की जूस में मौजूद नेचुरल शुगर और उसका हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स शरीर में मेटाबॉलिक बदलाव ला सकता है। अगर लंबे समय तक और अधिक मात्रा में जूस को कंज़्यूम किया जाए, तो ये न केवल शुगर बल्कि ब्लड प्रेशर को भी एफेक्ट कर सकता है।

स्पेशली उन लोगों के लिए जिन्हें पहले से ही हाइपरटेंशन या डायबिटीज है, उन लोगो के लिए ‘साइलेंट किलर’ भी साबित हो सकता है।

कब और कितना पीना है सही?
रिपोर्ट और डॉक्टर्स के मुताबिक, फ्रूट जूस पूरी तरह से जहर नहीं है, लेकिन इसके सेवन का तरीका और समय बहुत मायने रखता है:
दिन भर में बस एक छोटा गिलास जूस काफी है। इसे खाली पेट पीने के बजाय नाश्ते के साथ लेना बेहतर हो सकता है, ताकि इसका शुगर स्पाइक कम रहे।

बाजार में मिलने वाले जूस में एक्स्ट्रा शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं, जो बीपी के मरीजों के लिए और भी खतरनाक हैं।
एक्सपर्ट्स की सलाह
एक्सपर्ट्स की राय है की अगर आप ब्लड प्रेशर या शुगर के मरीज हैं, तो जूस के बजाय साबुत फल खाने की आदत डालें। फल का फाइबर न केवल आपके डाइजेशन को सुधारता है बल्कि ब्लड प्रेशर को कण्ट्रोल रखने में भी मदद करता है। किसी भी बड़े बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से कंसल्ट जरूर लें।