मिडिल ईस्ट युद्ध में Buy on Cannons रणनीति
वॉल स्ट्रीट की एक मशहूर पुरानी लाइन है – “Buy on the sound of cannons, sell on the sound of trumpets.” इसे अक्सर Nathan Rothschild से जोड़ा जाता है, जो नेपोलियन युद्धों के दौर में एक्टिव थे। सीधी भाषा में मतलब? जब हालात खराब हों, डर फैला हो, लोग बेच रहे हों – तब खरीदो। और जब सब कुछ अच्छा लगने लगे, खुशखबरी आ जाए – तब बेच दो।
यह एक classic contrarian strategy है – भीड़ के उल्टा चलो। लेकिन बड़ा सवाल यही है: क्या ये फॉर्मूला आज भी काम करता है, खासकर 2026 के ईरान-इजराइल-यूएस टकराव जैसे टेंशन भरे माहौल में?
मार्केट हमेशा facts पर नहीं, emotions पर भी चलता है। जैसे ही युद्ध या संकट आता है, investors घबरा जाते हैं – और यही panic selling मार्केट को नीचे खींचती है। लेकिन अगर economy की नींव मजबूत है, तो वही मार्केट बाद में recover भी करता है।
इसी सोच से जुड़ा एक और popular concept है – “buy the rumor, sell the fact.” यानी खबर आने से पहले खरीदो, और जब खबर confirm हो जाए, तब बेचो।
लेकिन क्या यह आज भी लागू होती है, खासकर ईरान-इजराइल-यूएस युद्ध (2026) जैसे मध्य पूर्व संकट में? आईये देखें क्या कहता है इतिहास –
यह कहावत नेपोलियन युद्धों से जुड़ी है, जहां रोथ्सचाइल्ड परिवार ने युद्ध के दौरान बॉन्ड्स और स्टॉक्स में मुनाफा कमाया। वाटरलू की लड़ाई की खबर से पहले उन्होंने बाजार में पैनिक बेचा और फिर सस्ते में खरीदा। आधुनिक अर्थ में यह बताती है कि बाजार अक्सर ओवररिएक्ट करते हैं – भय की वजह से गिरावट आती है, लेकिन आर्थिक बुनियाद मजबूत हो तो रिकवरी होती है। कई विश्लेषक इसे “buy the rumor, sell the fact” या “buy on bad news” से जोड़ते हैं।
ऐतिहासिक डेटा (S&P 500) बताता है कि जब भी कोई बड़ा जिओ-पॉलिटिकल शॉक आता है, तो बाजार शुरू में घबराकर गिरता है, लेकिन 1 से 12 महीने के अंदर शानदार रिकवरी करता है।
खास बात: पिछले 86 सालों के डेटा के अनुसार, बड़े संकटों के 12 महीने बाद 65% मामलों में मार्केट पॉजिटिव रिटर्न देता है। औसतन गिरावट सिर्फ 1% से 5% के बीच होती है, जो करीब 40 दिनों में रिकवर हो जाती है।
कुल मिलाकर: WWII, कोरिया, वियतनाम, गल्फ वॉर आदि में S&P 500 ने ज्यादातर पॉजिटिव या मिक्स्ड रिटर्न दिए। केवल 1973 जैसा ऑयल शॉक घातक रहा। युद्धों में volatility ~1/3 बढ़ जाती है, लेकिन लंबी अवधि में बाजार ऊपर चढ़ता है।
हालांकि, कुछ अध्ययन (जैसे 1918-2002 के 440 संकटों का) बताते हैं कि युद्ध बाजार के लिए नकारात्मक होते हैं – औसतन रिटर्न घटते हैं, volatility बढ़ती है। लेकिन यूएस मार्केट्स (S&P 500) में लंबी अवधि में रिजिलिएंस दिखती है।
अगर आप सोच रहे हैं कि सारा पैसा निकाल लें, तो रुकिए! पैनिक सेलिंग सबसे बड़ी गलती हो सकती है। यहाँ कुछ काम की बातें हैं:
फरवरी 2026 में ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमलों के बाद स्थिति थोड़ी तनावपूर्ण है:
इतिहास गवाह है कि युद्ध बाजार को हमेशा के लिए नहीं रोक सकते। अगर ट्रंप की बातचीत वाली खबरें सही निकलीं और शांति की ‘तुरहियाँ’ जल्द बजीं, तो अभी की गिरावट खरीदारी का सबसे अच्छा मौका साबित हो सकती है।
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