पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही हलचल तेज है। शुभेंदु सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बड़े नेताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शनिवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने ममता बनर्जी के भतीजे और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी के दफ्तर पर बुलडोजर चला दिया।
यह कार्रवाई दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला-बरुईपुर रोड पर स्थित अभिषेक बनर्जी के पांच मंजिला कार्यालय पर की गई है। प्रशासन का दावा है कि यह पूरी इमारत नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से बनाई गई थी।
सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने कुछ दिनों पहले ही इस पांच मंजिला इमारत पर एक नोटिस चस्पा किया था। प्रशासन का आरोप था कि इस बिल्डिंग का निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत जाकर किया गया था। इस मामले में अभिषेक बनर्जी के प्रतिनिधियों को जिला परिषद के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखने का समय दिया गया था।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, तय समय सीमा के भीतर टीएमसी या अभिषेक बनर्जी की तरफ से कोई भी प्रतिनिधि स्पष्टीकरण देने नहीं पहुंचा। इसके बाद सरकारी नियमों के तहत बेदखली और डिमोलिशन की प्रक्रिया शुरू की गई।
शनिवार सुबह जब प्रशासनिक अधिकारी बुलडोजर लेकर मौके पर पहुंचे, तो इलाके में तनाव फैल गया। किसी भी अप्रिय घटना या विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई थी। देखते ही देखते स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिन्हें पुलिस ने मुस्तैदी से दूर रखा।
यह कोई पहला मामला नहीं है जब टीएमसी नेताओं के ठिकानों पर बुलडोजर चला हो। इससे पहले बीते 24 मई को भी ईएम बाईपास के पास मथपुकुर में स्थित एक टीएमसी (TMC) पार्टी दफ्तर को अवैध निर्माण बताते हुए जमींदोज कर दिया गया था। बंगाल में सरकार बदलने के बाद से ही टीएमसी नेताओं के खिलाफ इस तरह की प्रशासनिक कार्रवाइयां लगातार जारी हैं।
इस कार्रवाई से पहले ही सांसद अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने नई सरकार पर राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाते हुए कहा था:
“पिछले कुछ हफ्तों में जांच एजेंसियों और पुलिस ने मेरे दफ्तर और मुझसे जुड़े करीब 25 लोगों को बिना किसी उचित कानूनी नोटिस के हिरासत में लिया या पूछताछ के लिए बुलाया है। उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वे मेरे खिलाफ झूठे बयान दे सकें। यह सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है।”
अभिषेक बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि उनके करीबियों के फोन टैप किए जा रहे हैं और उनके परिवार की महिलाओं को भी परेशान किया जा रहा है।
इस बड़ी बुलडोजर कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में उबाल आना तय माना जा रहा है। जहाँ एक तरफ शुभेंदु सरकार इसे कानून सम्मत कार्रवाई बता रही है, वहीं टीएमसी इसे विपक्ष को दबाने की सोची-समझी साजिश करार दे रही है।
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