SIR के बाद जारी हुई मतदाता सूची पर मचा बवाल
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आते ही सियासी हलचल तेज हो गई है, और इस बार केंद्र में है मतदाता सूची का विवाद. चुनाव आयोग ने ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) के बाद नई वोटर लिस्ट जारी की है, जिसमें से 65.64 लाख नाम हटाए गए हैं. पहले राज्य में कुल मतदाता संख्या 7.9 करोड़ से अधिक थी, जो अब घटकर 7.24 करोड़ रह गई है.
चुनाव आयोग का तर्क है कि हटाए गए मतदाताओं में मृत लोग, दूसरे राज्यों में बसे लोग और डुप्लीकेट नाम शामिल हैं. SIR के दौरान फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के जरिए नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया चली. 33,326 लोगों ने नाम जुड़वाने के लिए आवेदन दिया, जबकि 2,07,565 ने हटाने के लिए. इस दौरान 38,342 आपत्तियां आईं, जिन्हें एक सप्ताह में निपटा दिया गया. इसके बावजूद विपक्ष और नागरिक संगठनों का आरोप है कि कई योग्य मतदाताओं के नाम बिना सूचना के हटा दिए गए हैं.
मामला अब अदालत तक पहुंच चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि हटाए गए मतदाताओं की जिला-वार सूची सार्वजनिक की जाए और आधार कार्ड को वैध पहचान पत्र के रूप में स्वीकार किया जाए.
विपक्ष का सवाल
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम नहीं छूटना चाहिए. विपक्षी दलों का सवाल है कि आखिर 65 लाख लोगों को “चुपचाप” सूची से कैसे बाहर कर दिया गया? क्या यह लोकतंत्र को साफ करने की कोशिश है या लोकतंत्र को साफ करने की?
जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, यह विवाद अब एक बड़े राजनीतिक और कानूनी टकराव में तब्दील होता दिख रहा है. अगर जांच में खामी साबित हुई, तो 2025 का चुनावी मैदान और भी दिलचस्प हो सकता है.
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