विचार

महागठबंधन का बड़ा क्रैश! बिहार ने क्यों नकार दिया राहुल-तेजस्वी मॉडल?

14 नवंबर 2025… बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे जब सामने आए, तो पूरा देश अवाक रह गया.

जो राहुल गांधी 16 दिनों तक 1300 किलोमीटर की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ निकाल रहे थे, उनकी कांग्रेस 61 सीटों पर लड़कर सिर्फ 6 सीटें जीत पाई.

जो तेजस्वी यादव 26 लाख सरकारी नौकरियों का वादा कर रहे थे, उनकी RJD 2020 के 75 सीटों से गिरकर सिर्फ 24-25 सीटों पर सिमट गई.

और इधर… NDA ने 202 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया.

लेकिन सवाल यह है… क्या यह सिर्फ एक चुनावी हार थी? या फिर यह बिहार की राजनीति में एक बुनियादी बदलाव का संकेत है?

बिहार की राजनीति का काला अध्याय

‘जंगल राज’ का इतिहास: 1990-2005

बिहार की हार को समझने के लिए हमें पीछे जाना होगा… 1990 के दशक में, जब बिहार में लालू प्रसाद यादव और रबड़ी देवी की सरकार थी.

पटना हाई कोर्ट ने अगस्त 1997 में पहली बार ‘जंगल राज’ शब्द इस्तेमाल किया था – जब पटना में जलजमाव और खराब प्रशासन पर टिप्पणी करते हुए न्यायमूर्ति वी पी सिंह और धर्मपाल सिन्हा ने कहा कि स्थिति “जंगल राज से भी बदतर” है.

जंगल राज के भयानक आंकड़े:

1. गंभीर अपराधों का दौर:

* 1990 के विधानसभा चुनाव में 30 स्वतंत्र उम्मीदवार जीते, जो ज्यादातर ‘बाहुबली’ थे – स्थानीय अपराधियों ने राजनीति पर कब्जा कर लिया.

2. बुद्धिजीवियों और अधिकारियों पर हमले:

* 5 दिसंबर 1994: IAS अधिकारी जी कृष्णाय्या की निर्मम हत्या – मुज़फ्फरपुर में अपराधी नेता छोटन शुक्ला के अंतिम संस्कार जुलूस में भीड़ ने IAS अधिकारी पर हमला कर उन्हें मार डाला.

* चंपा बिस्वास केस: IAS अधिकारी बी बी विश्वास की पत्नी चंपा पर यौन हमले का आरोप – लालू के करीबी सहयोगी मृत्युंजय कुमार यादव और उनके साथियों के खिलाफ.

3. आर्थिक तबाही:

* सरकारी कर्मचारियों को महीनों-सालों तक वेतन नहीं मिला – 35,000 राज्य उपक्रम कर्मचारियों को वेतन रोका गया, जिससे आत्महत्याएं हुईं. 2002 में चंदन भट्टाचार्य ने अपने पिता के वेतन के विरोध में आत्मदाह कर लिया.

4. चारा घोटाला:

1997 में चारा घोटाला उजागर हुआ, जिसमें IAS वी एस दुबे ने लालू प्रसााद की भ्रष्टाचार को सामने लाया। इसी के बाद लालू ने 5 जुलाई 1997 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की स्थापना की.

नितीश कुमार का उदय: 2005

2005 में जब नितीश कुमार मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने ‘सुशासन’ का वादा किया.

उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि: तेज़ ट्रायल के माध्यम से मोहम्मद शहाबुद्दीन, आनंद मोहन, मुन्ना शुक्ला, पप्पू यादव जैसे अपराधी राजनेताओं को जेल भेजा – चाहे वे किसी भी पार्टी के हों।

यही कारण है कि बिहार की जनता ने 2025 में फिर से नितीश पर भरोसा किया.

राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषण: 2025 की हार के असली कारण

1. ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव पूरी तरह फ्लॉप

राहुल गांधी ने 17 अगस्त 2025 को सासाराम से ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की.

* यह यात्रा 25 जिलों में 1300 किलोमीटर की थी

* 110 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया

* 16 दिन तक चली

लेकिन नतीजा क्या रहा?

कांग्रेस 2020 में 70 सीटों पर लड़कर 19 सीटें जीती थी (27% की स्ट्राइक रेट)। 2025 में 61 सीटों पर लड़कर सिर्फ 6 सीटें जीत पाई (10% की स्ट्राइक रेट).

विडंबना देखिए:

1.जिन 10 सीटों पर राहुल गांधी ने रैलियां कीं, महागठबंधन उनमें से 9 सीटों पर हारा.

BJP होम मिनिस्टर अमित शाह ने कहा: “राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी बिहार में आज अंतिम स्थान पर पहुंच गई है… जनता ने ‘घुसपैठियों’ की रक्षा करने वाले राजनीति को करारा जवाब दिया है.”

2. महिलाओं का वोट NDA के पास चला गया

2025 में मतदान प्रतिशत 67.13% था – जो 1951 के बाद सबसे अधिक है.

और इसमें महिलाओं का योगदान सबसे ज्यादा था.

कारण:

* नितीश कुमार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना: 1 करोड़ से अधिक महिलाओं को ₹10,000 की सहायता

2020 चुनाव में भी यही पैटर्न था: महिला मतदान 59.69% था, जबकि पुरुष मतदान 54.45%.

3. RJD का ‘M-Y’ (मुस्लिम-यादव) फॉर्मूला असफल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA की जीत के बाद कहा: “बिहार की जनता ने ‘सांप्रदायिक M-Y फॉर्मूला’ को हराया है… अब नया ‘सकारात्मक M-Y’ होगा – ‘महिला और युवा’.”

तथ्य यह है: RJD का पारंपरिक वोट बैंक बिखर गया.

4. तेजस्वी यादव का अव्यावहारिक वादा

तेजस्वी यादव ने ‘तेजस्वी प्राण’ मैनिफेस्टो में वादा किया: हर घर में एक सरकारी नौकरी – यानी लगभग 2.6 करोड़ नौकरियां!

यह कैसे संभव है?

BJP और JDU ने इसे “अवास्तविक वादा” बताते हुए पूरे अभियान में इसका मजाक उड़ाया.

5. चिराग पासवान का उदय

2020 में चिराग पासवान की LJP (RV) ने सिर्फ 1 सीट जीती थी। 2025 में 28 सीटों पर लड़कर 19 सीटें जीतीं.

यह NDA की जीत में निर्णायक रहा – खासकर दलित और EBC (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) बहुल क्षेत्रों में.

6. तुलनात्मक आंकड़े: 2020 बनाम 2025

पार्टी   2020 सीटें     2025 सीटें     बदलाव

BJP         74           89           +15

JDU        43           85           +42

LJP(RV) 1              19           +18

NDA कुल     125         202         +77

RJD         75           24-25     -50

कांग्रेस 19           6              -13

महागठबंधन कुल     110         35           -75

वोट शेयर की विडंबना:

* RJD को सबसे ज्यादा वोट मिले: 1.11 करोड़ (11.1 मिलियन)

* BJP को 99 लाख (9.9 मिलियन)

* JDU को 95 लाख (9.5 मिलियन)

लेकिन RJD सिर्फ 24-25 सीटें ही जीत पाई! यह दिखाता है कि RJD के वोट बिखरे हुए थे, जबकि NDA के वोट केंद्रित थे.

NDA की जीत की रणनीति

रणनीति 1: ‘जंगल राज’ की याद ताज़ा करना

नितीश कुमार, नरेंद्र मोदी, अमित शाह – सभी ने लगातार ‘जंगल राज’ का जिक्र किया.

और यह काम कर गया.

30 साल से ऊपर की उम्र के लोग, जिन्होंने 1990-2005 का बिहार देखा था, वे फिर से उसी दौर में नहीं लौटना चाहते थे.

रणनीति 2: सोशल इंजीनियरिंग

NDA सिर्फ यादव-मुस्लिम पर निर्भर नहीं रहा. इसने:

* दलित समुदाय (चिराग पासवान के माध्यम से)

* EBC समुदाय (जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा के माध्यम से)

* महिलाएं (₹10,000 योजना के माध्यम से)

* युवा (विकास और रोजगार पर केंद्रित)

सभी को साथ लेकर चला.

रणनीति 3: ‘घुसपैठिया’ नैरेटिव

जब राहुल गांधी और महागठबंधन ने ECI के SIR (Special Intensive Revision) का विरोध किया, तो BJP ने इसे ‘घुसपैठियों की रक्षा’ बताया.

अमित शाह ने कहा: “बिहार की जनता ने यह संदेश दिया है कि मतदाता सूची की सफाई अनिवार्य है… घुसपैठियों की रक्षा करने वाली राजनीति का कोई स्थान नहीं है।”

रणनीति 4: राज्यसभा पर नियंत्रण

यह चुनाव सिर्फ बिहार विधानसभा के बारे में नहीं था.

2030 से पहले राज्यसभा की कई सीटों का कार्यकाल समाप्त होगा. बिहार में NDA की जबरदस्त जीत का मतलब है कि राज्यसभा में भी NDA का दबदबा बढ़ेगा.

विपक्ष के लिए खतरे की घंटी

14 नवंबर 2025 के चुनाव परिणाम सिर्फ बिहार के बारे में नहीं हैं.

यह पूरे विपक्ष के लिए एक भूकंप है.

तीन बड़े सबक:

1. राहुल गांधी की रणनीति फेल हो रही है

* महाराष्ट्र में हार

* हरियाणा में हार

* बिहार में करारी हार

‘वोट चोरी’ का नैरेटिव काम नहीं कर रहा. जनता को विकास और सुशासन चाहिए, षड्यंत्र के सिद्धांत नहीं.

2. तेजस्वी यादव को पुनर्विचार करना होगा

* 2020 में RJD: 75 सीटें

* 2025 में RJD: 24-25 सीटें

यह सिर्फ हार नहीं है, यह राजनीतिक विनाश है. लालू प्रसाद यादव का ‘जंगल राज’ का बोझ इतना भारी है कि उनके बेटे भी इसे उतार नहीं पा रहे.

3. विपक्ष में एकता की कमी

महागठबंधन में सिर्फ तेजस्वी यादव दिखाई दे रहे थे. कांग्रेस, वाम दल – सभी किनारे थे.

एक युवा कांग्रेस नेता ने कहा: “एक व्यक्ति का दिखना और पूरी गठबंधन का साथ मिलकर लड़ना – इसमें फर्क है.”

आगे क्या होगा?

बंगाल, केरल, तमिलनाडु – सभी राज्यों में अगले साल चुनाव हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार की जीत के बाद साफ इशारा दिया: “बंगाल में भी ‘जंगल राज’ खत्म होगा.”

यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं है… यह एक नई राजनीतिक व्यवस्था का संकेत है.

(नोट: – ये लेखक के निजी विचार हैं.)

S. Hanumanth Rao

Recent Posts

बेटी की शादी से पहले दामाद को लेकर फुर्र होने वाली सास का अब जीजा पर आया दिल… फिर कर बैठी ये कांड !

लखनऊ। अलीगढ़ का एक मामला इन दिनों लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। हर तरफ…

10 hours ago

किम जोंग उन की बेटी बनेगी उत्तर कोरिया की अगली नेता? खुफिया एजेंसी के दावे से दुनिया में चर्चा तेज

उत्तर कोरिया से एक दिलचस्प और बड़ी खबर सामने आई है। देश के सर्वोच्च नेता…

12 hours ago

Lamborghini हादसे में तम्बाकू किंग के बेटे को कोर्ट से मिली जमानत, ड्राइवर बोला — “साहब को मिर्गी का दौरा पड़ा”

कानपुर की वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को हुए हाई-प्रोफाइल सड़क हादसे ने एक बार…

13 hours ago

53वीं श्रीमती सुंदरी देवी अंतर-महाविद्यालय क्रिकेट: जेएनएमपीजी कॉलेज और लखनऊ क्रिश्चियन कॉलेज सेमीफाइनल में

लखनऊ। श्री जय नारायण मिश्रा पीजी कॉलेज में चल रही 53वीं श्रीमती सुंदरी देवी अंतर-महाविद्यालय…

14 hours ago

उदित नारायण पर उनकी पहली पत्नी के गंभीर आरोप, कहा- “बिना बताए निकलवाया गया गर्भाशय”, शिकायत दर्ज

बॉलीवुड के दिग्गज सिंगर उदित नारायण एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। उनकी…

16 hours ago

लोकसभा में सरकार ने क्यों लिया यू-टर्न? राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस नहीं लाएगी सरकार

बीते कुछ दिनों से राहुल गांधी और विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रहे हैं।…

16 hours ago