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बिहार क्रिकेट में बड़ा फर्जीवाड़ा! राकेश तिवारी की बढ़ी परेशानी, क्रिकेट ठगी केस फिर खुले!आदित्य वर्मा ने फिर खोला मोर्चा

पटना. बिहार में क्रिकेट के नाम पर फर्जीवाड़े और टीम चयन को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। हालांकि, तमाम विवादों के बीच बिहार के कुछ युवा खिलाड़ी-वैभव सूर्यवंशी, सकीबुल गनी और आयुष लोहारू ने विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।

इसी बीच बिहार क्रिकेट से जुड़ी एक बड़ी और गंभीर खबर सामने आई है। बिहार बीजेपी के प्रदेश कोषाध्यक्ष और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) के पूर्व अध्यक्ष राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ पटना की एक अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वारंट एक विज्ञापन कंपनी द्वारा दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मामले में जारी किया गया है।

बताया जा रहा है कि राकेश कुमार तिवारी पर फर्जी एनओसी के आधार पर 36 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 356(2) के तहत दर्ज किया गया है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 फरवरी की तारीख तय की है।

इस बीच बिहार पुलिस की एक विशेष जांच समिति (SIT) ने बिहार क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े दो प्रमुख आपराधिक मामलों में पूर्व की गई जांच को “त्रुटिपूर्ण” बताते हुए दोबारा जांच की सिफारिश की है। इससे क्रिकेट प्रशासन में कथित अनियमितताओं और राजनीतिक रसूख के दुरुपयोग को लेकर सवाल और गहरे हो गए हैं।

आदित्य वर्मा ने फिर खोला मोर्चा

बिहार क्रिकेट को लंबे समय से नजदीक से देखने वाले आदित्य वर्मा ने एक बार फिर गंभीर आरोप लगाते हुए कई मामलों में जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों के खिलाड़ियों से पैसे लेकर जाली दस्तावेजों के आधार पर उन्हें बिहार की टीम में खेलने का मौका दिया गया।

आदित्य वर्मा का दावा है कि यह सब तत्कालीन बीसीए अध्यक्ष राकेश तिवारी और उनके करीबी सहयोगियों—कौशल तिवारी, मनीष राज, नीरज सिंह, सुनील सिंह, मनीष कुमार, विष्णु शंकर और अनंत प्रकाश की मिलीभगत से हुआ।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पटना के एचडीएफसी बैंक में स्थित बीसीए खाते के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता आशुतोष नंदन सिंह की मृत्यु के बाद भी गलत तरीके से खाते से पैसे निकाले गए। इस संबंध में कोतवाली थाना पटना और श्रीकृष्णापुरी थाना पटना में दो मामले दर्ज कराए गए थे, लेकिन प्रभाव के चलते पुलिस ने इन्हें फाइनल रिपोर्ट के जरिए बंद कर दिया।

आदित्य वर्मा के अनुसार, उनके आवेदन पर बिहार के पुलिस महानिदेशक ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन कराया, जिसकी जांच में यह सामने आया कि मामलों को गलत तरीके से फाइनल किया गया था। इसके बाद दोबारा अनुसंधान की सिफारिश की गई।

उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एल. नागेश्वर राव भी बिहार क्रिकेट से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच कर रहे हैं। साथ ही, तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट उन्होंने अपने वकील के माध्यम से माननीय लोकपाल को भी भेज दी है।

आदित्य वर्मा ने भरोसा जताया कि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए बिहार क्रिकेट में सुधार होगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तय है।

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