FIFA World Cup 2026 के नॉकआउट स्टेज ‘राउंड ऑफ 32’ में वो हो गया है, जिसकी स्क्रिप्ट किसी ने नहीं सोची थी। टूर्नामेंट की सबसे ‘फेवरेट’ और 4 बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी अपना पैक-अप कर घर लौट रही है। अंडरडॉग पराग्वे ने वो मिरेकल कर दिखाया है जिसने पूरे फुटबॉल वर्ल्ड को शॉक में डाल दिया है। 120 मिनट के डेडलॉक के बाद, पराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी को 4-3 से नॉकआउट कर अपना राउंड ऑफ 16 का टिकट कटा लिया है। वर्ल्ड कप हिस्ट्री में जर्मन टीम आज तक कभी कोई पेनल्टी शूटआउट नहीं हारी थी। पराग्वे ने इस अजेय मिथक को हमेशा के लिए तोड़ दिया है।
मैच की शुरुआत से ही जर्मनी ‘बॉस मोड’ में थी। जर्मन प्लेयर्स ने पहले हाफ में गेंद पर ऐसा कंट्रोल रखा कि बैक-टू-बैक 244 पास पूरे कर डाले, जबकि पराग्वे की टीम सिर्फ 31 पास तक सिमट कर रह गई थी। लेकिन कहते हैं न कि फुटबॉल सिर्फ बॉल पजेशन का नहीं, सही मौके पर चौका मारने का खेल है।
जूलियो एनसीसो (Julio Enciso) ने एक कड़क हेडर गोल मारते हुए गेंद को नेट में डाल दिया। इस गोल के साथ पराग्वे ने 1-0 की लीड ली, जो वर्ल्ड कप नॉकआउट स्टेज के इतिहास में उनका पहला गोल भी था।
VAR का ‘महा-ड्रामा’ और काई हैवर्ट्ज “Kai Havertz” का कमबैक
दूसरे हाफ में जर्मन टीम ने ऑल-आउट अटैक किया। 54वें मिनट में स्टार प्लेयर काई हैवर्ट्ज “Kai Havertz” ने एक क्लिनिकल गोल दागकर जर्मनी को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। असली थ्रिलर अभी बाकी था।
एक्स्ट्रा टाइम में जोनाथन टाह ने गोल करके जर्मनी की जीत लगभग पक्की कर दी थी, लेकिन तभी सीन में आया VAR “वीडियो असिस्टेंट रेफरी”। एक लंबे और टेंस रिव्यू के बाद रेफरी ने गोलकीपर पर फाउल का फैसला सुनाया और गोल को ‘डिसअलाउ’ कर दिया। इस एक फैसले ने जर्मन फैंस की सांसें अटका दीं।
जब मैच पेनल्टी शूटआउट में गया, तो सबको लगा कि जर्मनी अपने क्लच ट्रैक रिकॉर्ड के दम पर मैच निकाल लेगी। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
दबाव के आगे जर्मनी के बड़े नाम “काई हैवर्ट्ज, निक वोल्तेमेडे और जोनाथन टाह” पेनल्टी मिस कर गए। दूसरी तरफ, पराग्वे के जोस कैनाले (Jose Canale) ने बिना किसी नर्वसनेस के विनिंग पेनल्टी को नेट के अंदर डाल दिया। इसी के साथ पराग्वे के खेमे में जश्न का सैलाब आ गया।
जर्मनी के 38 वर्षीय कोच जूलियन नैगल्समैन पिछले 40 सालों में वर्ल्ड कप नॉकआउट में टीम को लीड करने वाले सबसे युवा कोच बने, लेकिन उनके प्रोफाइल पर यह अनचाहा रिकॉर्ड भी जुड़ गया। साल 2010 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप खेल रही पराग्वे की टीम ने साबित कर दिया कि फुटबॉल में नाम नहीं, उस दिन का गेम मायने रखता है।
अब 4 जुलाई को होने वाले राउंड ऑफ 16 के मुकाबले में पराग्वे की टक्कर फ्रांस या स्वीडन के विनर से होगी।
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