कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन गोदाम की छत गिरने से बड़ा हादसा हो गया। इस दर्दनाक दुर्घटना में अब तक 8 मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 20 लोग घायल बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक अभी भी करीब 15 श्रमिकों के मलबे के नीचे फंसे होने की आशंका है, जिसके चलते राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 12 बजकर 7 मिनट पर हुआ, जब निर्माणाधीन गोदाम की विशाल छत अचानक भरभराकर गिर गई। घटना के समय परिसर में लगभग 40 मजदूर काम कर रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष से निर्माणाधीन इस गोदाम का क्षेत्रफल लगभग 20 हजार वर्ग फुट था। अधिकारियों ने बताया कि भवन के भीतर अलग-अलग कमरे या दीवारें नहीं थीं, जिसके कारण पूरी संरचना एक साथ ध्वस्त हो गई।
हादसे के दौरान भारी वजन के दबाव में कई लोहे के बीम भी मुड़ गए, जिससे मलबा हटाने का काम और चुनौतीपूर्ण हो गया।
घटना के तुरंत बाद सिविल डिफेंस, सेना, एनडीआरएफ, दमकल विभाग और कोलकाता पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। भारी कंक्रीट और लोहे के ढांचे को हटाने के लिए कई क्रेन और 50 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक क्रेन की मदद ली जा रही है।
रातभर बचाव कार्य जारी रखा गया। मौके पर अतिरिक्त एंबुलेंस, अस्थायी चिकित्सा शिविर और बड़े जनरेटर की भी व्यवस्था की गई।
बचाव दल को मलबे के भीतर से लोगों की आवाजें सुनाई देने की सूचना मिली थी। इसके बाद अभियान को और तेज किया गया। फंसे हुए श्रमिकों तक पानी और ऑक्सीजन पहुंचाने की भी व्यवस्था की गई।
लापता लोगों की तलाश के लिए पुलिस ने स्निफर डॉग की मदद भी ली है। प्रशासन का कहना है कि हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
हादसे में घायल हुए लोगों को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार दो घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है।
मृतकों में कृष्णा चौधरी, रोहित चौधरी और राहुल चौधरी की पहचान हो चुकी है, जबकि कुछ अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है।
स्थानीय निवासियों ने दावा किया है कि निर्माणाधीन गोदाम की संरचना बुधवार सुबह से ही असामान्य रूप से हिल रही थी। मजदूरों ने इसकी स्थिति का आकलन करने का प्रयास भी किया था, लेकिन कुछ ही समय बाद पूरी पांच मंजिला ऊंचाई वाली संरचना लोहे के बीमों सहित ढह गई।
इन दावों की भी जांच की जा रही है कि क्या हादसे से पहले निर्माण संबंधी कोई चेतावनी संकेत मौजूद थे।
पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए सुपरवाइजर सैयद मोहम्मद गुलजार, श्रमिक आपूर्ति से जुड़े मोहम्मद अताउल और सुभाष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है।
इसके अलावा गोदाम के ठेकेदार मोहम्मद असगर की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में भवन की योजना और निर्माण प्रक्रिया में गंभीर खामियों के संकेत मिले हैं।
कोलकाता नगर निगम के अभियंताओं ने भी शुरुआती जांच में भवन की योजना को दोषपूर्ण बताया है। विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद गोदाम के मालिकों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने बड़ा फैसला लेते हुए कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के सभी निर्माणाधीन वाणिज्यिक भवनों में 31 जुलाई तक निर्माण कार्य स्थगित करने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि इस अवधि में भवन योजनाओं और निर्माण स्वीकृतियों का व्यापक ऑडिट किया जाएगा। जिन परियोजनाओं के दस्तावेज और अनुमतियां सही पाई जाएंगी, उन्हें एक अगस्त से दोबारा निर्माण की अनुमति दी जाएगी।
हादसे के बाद क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल भी देखने को मिला। विरोध की आशंका को देखते हुए पूर्व मेयर फिरहाद हकीम को घटनास्थल से करीब 100 मीटर पहले ही वापस लौटना पड़ा।
बताया गया कि इससे पहले मौके पर पहुंचे एक पूर्व पार्षद को भी स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा और उन्हें वहां से लौटना पड़ा।
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