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नेतन्याहू की एक गलती से भड़का संकट, दुनिया भर में गैस और पेट्रोल को लेकर मचा हड़कंप, ट्रंप को देना पड़ा भरोसा

Iran, Israel और United States के बीच जारी तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल, ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं, वहीं ईरान भी लगातार आक्रामक रुख दिखा रहा है।

शुरुआत में ईरान सिर्फ उन ठिकानों को निशाना बना रहा था जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं, लेकिन अब उसने अपनी रणनीति बदलते हुए खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी हमले तेज कर दिए हैं। इस बीच इजरायल की एक बड़ी कार्रवाई ने पूरे मिडिल ईस्ट में हालात और बिगाड़ दिए हैं।

Israel ने Iran के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड पर बड़ा हमला

दरअसल, Israel ने Iran के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड पर बड़ा हमला कर दिया। यह दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस परियोजनाओं में शामिल है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर पड़ सकता है।

इसके जवाब में Iran ने Qatar की प्रमुख गैस फैसिलिटी को निशाना बनाया। इस हमले में कतर को भारी नुकसान होने की खबर है। कतर के कुल LNG (Liquefied Natural Gas) निर्यात का 80% से अधिक हिस्सा एशिया को जाता है, ऐसे में एशियाई देशों की गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अमेरिका, इजरायल की मदद के बिना भी ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड को पहले से कहीं ज्यादा ताकत से तबाह कर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा और तेल-गैस की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।

Iran ने जवाबी रणनीति के तहत Qatar को बड़ा झटका दिया

इसके साथ ही Iran ने जवाबी रणनीति के तहत Qatar को बड़ा झटका दिया है। माना जा रहा है कि इस हमले के बाद कतर को हर साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। भले ही कतर इस जंग में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन Israel और United States के साथ उसके करीबी संबंध उसे भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

दरअसल, इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के नेतृत्व में ईरान के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले ने वैश्विक स्तर पर हलचल मचा दी है। इस कार्रवाई ने न सिर्फ तनाव को बढ़ाया है, बल्कि पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट की आशंका भी पैदा कर दी है।

इसके जवाब में Iran ने ताबड़तोड़ पलटवार करते हुए अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाया। सबसे ज्यादा असर Qatar के गैस उत्पादन पर पड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में कतर के गैस उत्पादन का करीब 17% हिस्सा प्रभावित या नष्ट हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो कतर को अगले 5 साल तक हर साल 2 लाख करोड़ रुपये तक का नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसका सीधा असर वैश्विक गैस सप्लाई और कीमतों पर पड़ेगा।

भारत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है

भारत पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी कुल गैस जरूरतों का लगभग 47% हिस्सा कतर से आयात करता है। ऐसे में अगर सप्लाई बाधित होती है, तो देश में ऊर्जा संकट और कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

Qatar को बड़ा झटका उस समय लगा जब Iran की मिसाइलों ने उसके प्रमुख औद्योगिक केंद्र रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया। इस हमले में एनर्जी ट्रेन्स 4 और 6 पूरी तरह तबाह हो गईं, जो कतर के गैस उत्पादन की रीढ़ मानी जाती थीं।

इन दोनों ट्रेन्स से कतर हर साल करीब 1.28 करोड़ टन LNG (Liquefied Natural Gas) का उत्पादन करता था, जो उसके कुल गैस उत्पादन का लगभग 17% हिस्सा है। इस नुकसान ने कतर की ऊर्जा सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इन गैस सुविधाओं को फिर से चालू करने में करीब 5 साल तक का समय लग सकता है। इससे कतर को लंबे समय तक आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

ऊर्जा सेक्टर पर दबाव और बढ़ गया

हमले के बाद कतर ने एहतियातन एलपीजी (LPG) उत्पादन को भी रोक दिया है, जिससे ऊर्जा सेक्टर पर दबाव और बढ़ गया है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ेगा जो कतर से गैस आयात करते हैं, खासकर एशियाई बाजार।

माना जा रहा है कि इस संकट का असर वैश्विक गैस कीमतों और सप्लाई चेन पर लंबे समय तक देखने को मिलेगा। India की ऊर्जा सुरक्षा पर भी इस संकट का सीधा असर पड़ सकता है। भारत अपनी कुल खपत का करीब 60% LPG (Liquefied Petroleum Gas) आयात करता है, जिसमें से 60% से अधिक हिस्सा Qatar से आता है। ऐसे में कतर में उत्पादन घटने का प्रभाव भारत में गैस सप्लाई और कीमतों पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।

इस बीच, कतर की प्रमुख ऊर्जा कंपनी QatarEnergy के CEO Saad al-Kaabi ने कहा है कि LNG उत्पादन में आई गिरावट के चलते आने वाले 5 साल तक वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बना रहेगा।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कतर को अपने बड़े आयातक देशों जैसे China, South Korea, Italy और Belgium के साथ नए सिरे से समझौते और सप्लाई संतुलन बनाना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कतर से गैस सप्लाई में आई कमी का असर सिर्फ एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोप तक देखने को मिलेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर गैस की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

news desk

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