सियासी

Bengal Election Result: 4 मई से पहले BJP का ‘मिशन काउंटिंग’ तैयार, कोलकाता में महाबैठक और सिलीगुड़ी में ‘घेराबंदी’!

पश्चिम बंगाल में सत्ता की चाबी किसके हाथ लगेगी, इसका फैसला 4 मई को होने जा रहा है। लेकिन नतीजों से 48 घंटे पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक अपनी ताकत झोंक दी है। एग्जिट पोल्स में मिल रही बढ़त से उत्साहित बीजेपी अब मतगणना के दिन किसी भी तरह की ‘चूक’ की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती। इसी कड़ी में 2 मई को कोलकाता में एक हाई-लेवल रणनीतिक बैठक बुलाई गई है।

सुनील बंसल और भूपेंद्र यादव ने संभाली कमान

बीजेपी के चाणक्य माने जाने वाले सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बंगाल में ही डेरा डाल दिया है। इन दोनों दिग्गजों की रणनीति का मुख्य फोकस ‘काउंटिंग मैनेजमेंट’ पर है:

  • 30 अप्रैल: कोलकाता में मतदान की ग्राउंड रिपोर्ट ली गई।
  • 1 मई: सिलीगुड़ी में काउंटिंग एजेंट्स को ट्रेनिंग दी गई कि हर राउंड की बारीकी से निगरानी कैसे करनी है।
  • 2 मई की महाबैठक: कोलकाता में उन सभी ‘प्रवासी नेताओं’ को तलब किया गया है, जिन्हें चुनाव के दौरान अलग-अलग जोन और विधानसभाओं का प्रभारी बनाया गया था।

‘प्रवासी सेना’ को मिला टास्क: हर टेबल, हर आंकड़े पर नजर

बीजेपी की 2 मई की बैठक का एजेंडा बिल्कुल साफ है। पार्टी ने तय किया है कि मतगणना के दिन सभी प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में मौजूद रहेंगे।

  1. राउंड-दर-राउंड मॉनिटरिंग: हर राउंड की गिनती के बाद आंकड़ों का मिलान सुनिश्चित करना।
  2. एजेंट्स की मुस्तैदी: बूथ स्तर से लेकर काउंटिंग सेंटर तक तैनात एजेंट्स को अलर्ट मोड पर रखना।
  3. कड़ी टक्कर वाली सीटें: बंगाल की दर्जनों सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी है, जहाँ जीत-हार का अंतर 1000 से भी कम रह सकता है। ऐसी सीटों के लिए बीजेपी ने विशेष ‘सुपरवाइजर’ तैनात किए हैं।

बीजेपी का उत्साह बनाम टीएमसी का दावा

जहाँ अधिकांश एग्जिट पोल्स बंगाल में बीजेपी की सरकार बनने की भविष्यवाणी कर रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी की टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और ‘जमीनी पकड़’ के दम पर जीत के प्रति आश्वस्त है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 4 मई की निर्णायक जंग से पहले 2 मई की यह बैठक बीजेपी की आखिरी ‘रणनीतिक कवायद’ है। पार्टी का मानना है कि चुनाव जीतना एक बात है, लेकिन मतगणना के दौरान अपनी बढ़त को सुरक्षित रखना दूसरी बड़ी चुनौती है।

“बीजेपी इस बार कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। सिलीगुड़ी से लेकर कोलकाता तक, हर काउंटिंग टेबल पर पार्टी की पैनी नजर रहेगी।”

news desk

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