ईरान और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिका लगातार ईरान पर परमाणु समझौते और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर दबाव बना रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि यदि उस पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो वह कड़ा और व्यापक जवाब देगा।
इस बीच चीन और रूस ने भी ईरान के समर्थन में बयान दिए हैं। चीन ने साफ कहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता से खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि वॉशिंगटन ने तेहरान पर सैन्य कार्रवाई की तो बीजिंग रेयर मेटल (दुर्लभ धातुओं) के निर्यात पर सख्त कदम उठा सकता है।
गौरतलब है कि दुनिया में दुर्लभ धातुओं के सबसे बड़े भंडार और निर्यातकों में चीन अग्रणी है, और इनका उपयोग रक्षा उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक्स और उच्च तकनीक उद्योगों में होता है।
उधर जिनेवा में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच ओमान की मध्यस्थता में संभावित वार्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयास सफल रहे तो टकराव टल सकता है, अन्यथा क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ने का खतरा बना रहेगा।
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि उस पर किसी भी तरह का हमला हुआ तो वह कड़ा जवाब देगा। तेहरान का कहना है कि खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर आ सकते हैं। साथ ही ईरान और इजरायल के बीच पहले से जारी तनातनी भी इस स्थिति को और गंभीर बना सकती है।
वहीं इजरायल सुरक्षा कारणों से अलर्ट पर है। विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्रीय समीकरणों के चलते अमेरिका और इजरायल, दोनों ही ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को लेकर सतर्क हैं।
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