वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से बड़ी खबर है। बरसों से चली आ रही परंपरा पहली बार टूटी, जब ठाकुर जी को बाल और शयन भोग नहीं लगा। जानकारी के अनुसार, भोग तैयार नहीं हो सका क्योंकि हलवाई को भुगतान नहीं किया गया। इस वजह से सोमवार को ठाकुर जी बिना भोग के भक्तों को दर्शन देने पर मजबूर रहे।
परंपरा टूटने पर स्थानीय लोगों और मंदिर के गोस्वामियों में आक्रोश देखा गया। वहीं, पावर कमेटी ने इस पूरे मामले से अपना पल्ला झाड़ने की कोशिश की।
वृंदावन के श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में हर दिन लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से आते हैं, और यह परंपरा उनके लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है।श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर कमेटी बनाई है। इसी कमेटी के तहत ठाकुर जी के प्रसाद और भोग तैयार करने के लिए हलवाई नियुक्त किया गया है। हलवाई को प्रतिमाह 80,000 रुपये वेतन मिलता है, लेकिन कुछ महीनों से भुगतान रुका हुआ था। इसी वजह से हलवाई ने बाल भोग और शयन भोग तैयार नहीं किया।
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